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अखिलेश यादव के संघर्ष युद्ध में सबसे बड़े सारथी बने प्रो. रामगोपाल यादव

वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। प्रो. रामगोपाल यादव सही मायनों में शिक्षक हैं। कॉलिज के पाठयक्रम से लेकर जीवन के हर अध्याय को उन्होंने बखूबी पढ़ा है और दूसरों को पढ़ाने की कला जानते हैं। चुनाव से पहले समाजवादी परिवार में अमर सिंह की एंट्री ना जाने कहां से हो गयी। ये प्रो. रामगोपाल यादव ही थे जिन्होंने सबसे पहले इस एंट्री के साईड इफैक्ट को भांप लिया था। उन्होंने सबसे पहले विरोध भी किया। जब धीरे धीरे समाजवादी परिवार में विरोध बढ़ा और संग्राम की स्थिति आ गयी तब प्रो. रामगोपाल यादव ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ रचे जा रहे षडयंत्र के खिलाफ मजबूत मोर्चे बंदी की। अखिलेश संघर्ष में आये तो प्रो. रामगोपाल यादव उनके साथ आकर खड़े हो गए। सबसे पहले उन्होंने पत्र लिखा। पत्र की भाषा ही सबकुछ बता रही थी। इस पत्र में वह पूरी तरह अखिलेश के साथ थे।
अखिलेश का साथ देने की कीमत भी उन्होंने वह चुकाई जो शायद प्रो. रामगोपाल यादव सपने में भी नहीं सोच सकते थे। समाजवाद के सबसे बड़े चेहरे को समाजवादी पार्टी से ही निष्कासित कर दिया गया। बावजूद इसके प्रो. रामगोपाल यादव ने ना धैर्य खोया और ना ही अखिलेश को अकेला छोड़ा। अखिलेश के प्रति उनका प्रेम इसी दौर में सबने देखा। ये प्रो. रामगोपाल यादव की रणनीति ही थी जो आज अखिलेश यादव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। प्रो. रामगोपाल यादव नहीं होते तो अखिलेश यादव को ही कुछ ताकतें समाजवादी पार्टी से ही गायब करने पर तुल गयी थीं। समाजवादी संग्राम वो दौर था जब प्रो. रामगोपाल यादव ने अखिलेश यादव के लिए मां और पिता दोनों की भूमिका निभाई। निष्कासन के बाद भी एक शब्द ना पार्टी के खिलाफ बोला और ना ही मुलायम सिंह यादव के खिलाफ। अखिलेश यादव के लिए राजनीतिक जीवन में पहला मौका था जब वह षडयंत्र का सामना कर रहे थे। यहां पूरी ताकत से प्रो. रामगोपाल यादव उनके साथ खड़े हो गए। सपा में स्थिति यहां तक आ गयी कि युवाओं की टोली तो पूरी तरह आई एम विद अखिलेश के नारे के साथ खड़ी हो गयी थी।
सरकारें तो आती जाती रहती हैं लेकिन राजनीति में सिद्धांतों के साथ मजबूती से कैसे लड़ा जाता है ये पाठ प्रो. रामगोपाल यादव ने अखिलेश यादव को सिखाया। आज सपा कुनबे में फूट डलवाने वाले अमर सिंह का कहीं अता पता नहीं है और उस समय प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा अमर सिंह को लेकर की गयी भविष्यवाणी सही साबित हुई। समाजवादी पार्टी को बिखरने से बचाने का काम भी प्रो. रामगोपाल यादव ने ही किया। उनकी 25 साल की संसदीय यात्रा में समाजवादी संग्राम भी एक अहम पड़ाव रहेगा। क्योंकि इस पड़ाव में प्रो. रामगोपाल यादव को उस गुनाह की सजा निष्कासन के रूप में मिली जो उन्होंने किया ही नहीं था। उन्होंने मजबूती के साथ सच का साथ दिया था। उन्हें लगता था कि यदि इस समय ऐसा नहीं हुआ तो समाजवादी विचारधारा का सबसे बड़ा नुकसान होगा। अब कई समाजवादी नेता भी मानते हैं कि यदि उस समय प्रो. रामगोपाल यादव के दिशा निर्देशन में सब चले होते तो आज राजनीति का समाजवादी दृश्य कुछ और ही होता।

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