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एयर सेफ्टी ऑडिट में म्यांमार, पाक और नेपाल से भी पीछे भारत

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत का एयर सेफ्टी स्कोर एशिया पसिफिक क्षेत्र में म्यांमार, बांग्लादेश, मालदीव, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और यहां तक कि नॉर्थ कोरिया से भी कम है। जो देश इसमें भारत से नीचे हैं, वे बहुत छोटे और ऐसे देश हैं, जिनका नाम भी आपने नहीं सुना होगा, जैसे पापुआ न्यू गुइनिया, तिमोर लेस्टे, वनुआतु और समोआ। यूनाइटेड नेशन के इंटरनैशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने पिछले साल के आखिर में एक एविएशन सेफ्टी ऑडिट किया था। इसमें भारत अपनी पूर्व की रैंकिग 66 प्रतिशत से 57 प्रतिशत तक आ गया है। आईसीएओ यूनिवर्सल सेफ्टी ओवरसाइट ऑडिट प्रोग्राम इस बात की जांच करता है कि देश प्रभावित ढंग से सेफ्ट ओवरसाइट सिस्टम को लागू करते हैं या नहीं। भारत उन 15 देशों में शामिल है, जो सबसे कम टारगेट रेट से नीचे आते हैं। इसमें कमी का मतलब है कि भारतीय एयरलाइंस अमेरिका के लिए नई फ्लाइट नहीं ला सकेंगी और अमेरिकी एयरलाइंस के साथ गठबंधन भी नहीं हो सकेगा। इसके अलावा एयर इंडिया और जेट एयरवेज जैसी भारतीय एयरलाइंस को अमेरिका में लैंडिंग के बाद और भी जांच से गुजरना होगा।
इससे भारतीय एयरलाइंस के ग्लोबल विस्तार की योजनाओं को भी झटका लग सकता है। इससे पहले 2014 में भी भारत की रैंकिंग को कम किया गया था। भारत के साथ घना, इंडोनेशिया, उरूगवे और जिम्बाब्वे की रैंकिंग भी घटाई थी। भारत की रैंकिंग एक साल बाद ठीक कर दी गई थी। इस रैंकिंग में भारत के खराब प्रदर्शन का एक कारण सरकार द्वारा सरकारी नियामक डीजीसीए की अवहेलना करना है। आईसीएओ ऑडिटर्स ने जिसे चिंता की बात माना है, वह यह है कि एयर-ट्रैफिक कंट्रोलर्स की लाइसेंसिंग का काम सरकार द्वारा संचालित एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया देती है। एटीसी के अधिकारी भी एएआई के पेरोल पर ही काम करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुताबिक, यह काम डीजीसीए को करना चाहिए। जो देश भर में फ्लाइट के ऑपरेशन में सबसे कम भागीदारी रखती है।

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