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सरदार जी केस के बाद ले ली भाजपा संगठन वालों ने सीख

कहा कार्यकर्ता ही करे केवल आवेदन, यही रहेगा सबसे ठीक
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। भाजपा में कुछ दिन पहले सरदार जी को लेकर एक कार्यकर्ता ने ही मोर्चा खोल दिया था। मामला सरदार जी को लेकर था और सीन में विधायक जी भी टारगेट पर आ गए थे। कार्यकर्ता इस बात से नाराज थे कि भगवा पगड़ी पहनने से क्या कोई कार्यकर्ता हो जाता है। नाराजगी तब और ज्यादा बढ़ गई जब यह पता चला कि सरदार जी को सरकारी वाली जिम्मेदारी देने की सिफारिश तो विधायक जी ने बकायदा लिखित में दी थी। मामला बढ़ा और सुना है कि सरदार जी वाले केस की गूंज लखनऊ तक सुनाई दी। अब कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है। शायद संगठन भी इसी कहावत पर चल रहा है। संगठन अब कार्यकर्ता को इस बात का मौका नहीं देना चाहता कि कार्यकर्ता को सम्मान नहीं मिला। कार्यकर्ता को मौका नहीं मिला। लिहाजा अब सरदार जी वाली कहानी दोबारा रिपीट नहीं होगी। महानगर अध्यक्ष ने जो निर्देश जारी किया है उसमें उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी वकील के लिए कार्यकर्ता वाली दलील सबसे पहले चाहिए। बता दिया है कि जिला न्यायालय गाजियाबाद में शासकीय अधिवक्ता की नियुक्तियां होनी है। संदेश डाल दिया है कि इन नियुक्तियों के लिए भाजपा संघ व विचार परिवार के कार्यकर्ता आवेदन करें।

साथ में यह भी बता दिया है कि इन नियुक्तियों के लिए वो ही कार्यकर्ता आवेदन करें जो अधिवक्ता हैं और जिन्हें 10 वर्षों से अधिक का वकालत का अनुभव है। भाजपा अध्यक्ष द्वारा जो मैसेज दिया गया है उसमें कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए यह भी लिखा गया है कि अपने कार्यकर्ताओं को अधिक से अधिक आवेदन करना चाहिए। यानि अब सरदार जी वाले मामले से संगठन वालों ने सीख ले ली है। वह नहीं चाहते कि फिर से ऐसी कोई चूक हो और कार्यकर्ताओं के बवंडर का तूफान सोशल मीडिया पर आये। इस पहल को भाजपा में अच्छा माना जा रहा है और इसे पारदर्शिता के तौर पर भी देखा जा रहा है। भाजपा की एक लॉबी मान रही है कि इससे कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह बढ़ेगा और सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी बनें लेकिन भाजपा का कार्यकर्ता ही बनेगा।

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