लगातार तनाव में रहने से बढ़ती है एसिडिटी, बनती है आहार नली में कैंसर का कारण

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कानपुर (ईएमएस)। मानसिक तनाव केवल डिप्रेशन, ब्लडप्रेशर, हाइपरटेंशन और हृदय रोग का ही कारक नहीं है, बल्कि आहार नली के कैंसर की वजह भी हो सकता है। कानपुर स्थित जेके कैंसर संस्थान के चिकित्सकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। इस समस्या को बैरल सिंड्रोम कहा गया है। संस्थान में दो साल तक तीन हजार मरीजों किए गए विस्तृत अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है। ये सभी मरीज औसतन पांच सालों से मानसिक तनाव में थे। यह भी पता चला कि आहार नली के कैंसर के मरीजों की संख्या में प्रतिवर्ष दो फीसदी का इजाफा हो रहा है। इनमें कामकाजी लोग, कारोबारी और छात्र, हर वर्ग के लोग शामिल हैं। 40-45 आयु वर्ग के लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
अध्ययन दल ने पाया कि लंबे समय तक तनाव में रहने वाले लोगों में अम्लता यानी एसिडिटी का स्तर बढ़ गया था। जो आहार नली में घाव और फिर कैंसर का कारक बन जाता है। पेट का बार-बार फूलना, सीने और पेट में जलन, पेट में दर्द या मरोड़ होना आदि एसिडिटी के सामान्य लक्षण हैं। हालांकि अब तक यही माना जाता था कि अनियमित खानपान, अनियमित दिनचर्या, शराब सेवन और वसायुक्त-तीखा खाना आदि एसिडिटी के मुख्य कारण हैं। अब नया तथ्य- बैरल सिंड्रोम सामने आया है। तनावग्रस्त रहने पर शरीर में बना अधिक एसिड आमाशय की निचली सतह में जमा होने लगता है। इससे उसकी अंदरूनी सतह यानी म्यूकेजल लाइन में घाव होने लगता है। संस्थान ने दो वर्ष के दौरान एसिडिटी और गले में जलन वाले तीन हजार मरीजों पर अध्ययन किया। सभी कैंसर की आशंका पर जांच के लिए आए थे। ये पांच से अधिक वर्ष से तनाव में रह रहे थे। इनमें से 600 मरीज कैंसरग्रस्त मिले। प्रत्यक्ष लक्षण न होने से इसका पता देर से चला।
कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहने से एड्रीनेलिन हार्मोन का स्नाव बढ़ जाता है। इससे पेराटाइल ग्रंथि अधिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (एचसीएल) बनाने लगती है। जो अम्लता या एसिडिटी को बढ़ा देता है। यह अम्ल आमाशय की निचली सतह में जमा होने लगता है। खट्टी डकार के साथ अम्ल गले तक आने लगता है। लगातार ऐसी स्थिति बनने के कारण आहार नली से आमाशय तक पहले छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं और फिर घाव। समय पर इलाज न होने से यही कैंसर में तब्दील हो जाते हैं।