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एसबीआई की इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार किसानों हर साल मिले 8 हजार की आर्थिक मदद

नई दिल्ली (ईएमएस)। बजट 2019 में कृषि क्षेत्र के लिए मोदी सरकार कई उपाय किए जा सकते हैं। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मोदी सरकार को आगामी बजट में निवेश उद्देश्य के लिए एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव मुहैया कराने की भी जरूरत है। यह बात एसबीआई की इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एग्री टर्म लोन के लिए इंसेंटिव या तो ब्याज सब्सिडी या फिर क्रेडिट गारंटी फंड के लिए मैकेनिज्म बनाकर उपलब्ध कराया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि कृषि क्षेत्र के लंबी अवधि फायदों के लिए सरकार को किसानों को प्रदान की जाने वाली आर्थिक मदद को 5 सालों में 6000 सालाना से बढ़ाकर 8000 करने की कोशिश करनी चाहिए। हमारा मानना है कि आर्थिक मदद स्कीम देश के 14 करोड़ किसानों की आय और उनका जीवन-स्तर बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इकोरैप रिपोर्ट की कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर वक्त-वक्त पर बढ़ोत्तरी कर किसानों की आर्थिक मदद की राशि को 6000 से बढ़ाकर 8000 रुपये कर दिया जाता है, तब वित्तीय घाटा में घटकर जीडीपी का 3 फीसदी हो जाता है, तब 14 करोड़ गरीब किसानों के लिए अतिरिक्त लागत 12,000 करोड़ सालाना ही बैठेगी। रिपोर्ट में कहा गया कि चूंकि हम फिर ग्रोथ दर्ज कर रहे हैं, आर्थिक मदद के साथ भी वित्तीय घाटा घटकर वित्तवर्ष 2024 में जीडीपी के 3 फीसदी पर आ सकता है। इसकी वजह है कि जीडीपी भी घटकर 0.40 फीसदी से 0.34 फीसदी पर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय संस्थाएं व सरकार किसानों को फसल उगाने से लेकर बेचने तक में मार्केट सपोर्ट प्रदान कर उनकी मदद कर सकते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इस वक्त मुख्य रूप से तीन तरह की फसल-फूड क्रॉप, ऑयलसीड्स, सालाना कमर्शियल/हॉर्टीकल्चर क्रॉप्स को कवर करती है। इसके कारण बैकों द्वारा दिए जाने वाले फसल लोन में से केवल 30 फीसदी ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर हो पाते हैं। सरकार को हर तरह की फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर करना चाहिए। इससे बैंकों को रिस्क मैनेज करने में मदद होगी।

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