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8 माह पहले फार्म भरवाए, पूछताछ की तो नहीं मिला रिकार्ड मामला हाउसिंग फार ऑल योजना का

भोपाल (ईएमएस)। करीब आठ महीने पूर्व हाउसिंग फार ऑल योजना में नॉन स्लम एरिया के लोगों से फार्म भरवाए गए, लेकिन जब वेरिफिकेशन की बारी आई तो पता चला कि उनका रिकार्ड ही गायब हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना हाउसिंग फार ऑल में रेट तय होने से पहले ही गड़बड़ियां सामने आने लगी हैं। लोग पूछताछ के लिए आईएसबीटी स्थित हाउसिंग फार ऑल सेल में गए तो पता चला कि उनका रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं है। उनसे दोबारा फार्म भरवाए जा रहे हैं। न्यू सुभाष नगर निवासी एसके पांडेय ने आठ महीने पहले नॉन स्लम के तहत आवास के लिए आवेदन किया था। उनके मुताबिक जब वे आईएसबीटी स्थित हाउसिंग फॉर ऑल कार्यालय में आवास के संबंध में जानकारी लेने पहुंचे तो वहां बताया गया कि एनजीओ के प्रतिनिधि बताएंगे। इधर-उधर भटकने के बाद निगम कर्मचारियों ने बताया कि उनका रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं है। फिर दोबारा फार्म भरवाया गया। पावती तक नहीं दी गई। यहां बताया गया कि पुराना डाटा नहीं मिल रहा है। इसी तरह जहांगीराबाद निवासी सुरेश पांडेय ने भी आठ महीने पहले आवेदन किया था, उन्हें निगम की ओर से कॉल आया कि वेरिफिकेशन किया जाना है, लेकिन महीने भर से कोई नहीं आया। निगम ने करीब डेढ़ साल पहले फार्म संबंधी काम के लिए स्वनिल एजुकेशन सोसायटी को काम सौंपा था। बाद में सर्वे और वेरिफिकेशन का काम भी इसी एजेंसी को सौंप दिया गया। महीने में इसके एवज में करीब छह-सात लाख का भुगतान भी किया जा रहा है। बताया जाता है कि 50 हजार से अधिक आवेदन फार्म भी भरवाए गए। लेकिन ठीक से रिकार्ड को संरक्षित नहीं किया गया। कुछ फार्म माता मंदिर निगम मुख्यालय में धूल खा रहा हैं तो कुछ आईएसबीटी में हैं। जबकि, निगम के पास इस सेल में पहले से ही 45 कर्मचारी हैं, इसके बाद भी निगम एनजीओ की मदद ले रहा है।
हाउसिंग फॉर ऑल शाखा द्वारा हेल्पलाइन नंबर नहीं जारी नहीं किया गया। इस कारण लोग नए या पुराने आवेदन के संबंध में अपडेट नहीं ले पा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था नहीं है, जिससे लोग कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। एक बड़ी खामी यह भी है कि आवेदन फार्म जमा करने के बाद पावती नहीं दी जाती। इससे रिकार्ड गायब होने पर हितग्राही आवास से वंचित हो जाएंगे। जिस एनजीओ को काम सौंपा है, उसके प्रतिनिधि कार्यालय में नहीं बैठते। रिकार्ड संबंधी गड़बड़ी के बाद भी निगम अफसर एनजीओ पर कार्रवाई के बजाय उनका भुगतान कर रहे हैं। इसमें एनजीओ द्वारा कितने कर्मचारी लगाए गए हैं, इसका रिकार्ड भी निगम के पास नहीं है। कार्यालय में नए आवेदन फार्म उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जटिल की गई है। आवेदन से पहले आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता कार्ड, किरायानामा, जाति प्रमाण पत्र, समग्र आईडी आदि देखा जा रहा है। एक भी दस्तावेज कम होने पर फार्म नहीं दिया जा रहा है। इधर, निगम नॉन स्लम वाले आवासों के एलआईजी और एमआईजी के रेट फाइनल करने की तैयारी में है। इसके बाद लाटरी के माध्यम से हितग्राहियों को आवासों की बुकिंग की जाएगी। इस बारे में नगर निगम अपर आयुक्त मलिका निगम नागर का कहना है कि हाउसिंग फार ऑल में हितग्राहियों को आवास दिया जाना है। आवेदन फार्म और रिकार्ड संबंधी दिक्कतों के संबंध में जानकारी ली जाएगी। यदि कहीं कोई कमी है तो उसे दुरुस्त किया जाएगा।

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