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रिकॉर्डिंग में फंस गई 73 हजार रुपए की पेमेंट

नगर निगम चुनाव का मामला और अधिकारी ने कह दिया ‘नो’
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। सरकार का काम अपने हिसाब से चलता है और प्रशासन का निजाम अपने हिसाब से चलता है। न सरकार गलत है और न ही प्रशासन गलत है। जब पैसा सरकार के खाते से जाना है तो फिर अधिकारी भी भुगतान से पहले खाते को भलीभांति चेक करते हैं। ऐसे ही एक रोचक मामले में सीसीटीवी कैमरों के बिल का पेंच फंस गया है। जो सीसीटीवी कैमरे स्ट्रांग रूम की निगरानी कर रहे थे, उनकी निगरानी जब अधिकारियों ने की तो बिल का मामला अटक गया। सूत्र बताते हैं कि जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा पंचायत एवं स्थानीय निकाय चुनाव में सीसीटीवी कैमरों के लिए जीएचएफ टेक्नॉलोजी नामक कंपनी को प्रशासन ने नियुक्त किया था। कंपनी ने इन कैमरों के किराए के रूप में 73 हजार रुपए का बिल जब निर्वाचन विभाग को सौंपा तो बिल सत्यापित होने के लिए आया। यहां नगर निकाय चुनाव में वीडियोग्राफी का प्रभार देख रहे मनोरंजन कर अधिकारियों ने जब सीसीटीवी कैमरों के बिल को अपनी नजरों के सीसीटीवी कैमरे से देखा तो बिल में फाल्ट नजर आ गया। जिस कंपनी के नाम ठेका था उस कंपनी ने बिल ही नहीं भेजा।
बिल दूसरी कंपनी ने भेजा। इसी आधार पर वीडियोग्राफी के सहप्रभारी अधिकारी ने उप जिला निर्वाचन अधिकारी को लिखित में अवगत करा दिया कि इस बिल को इस आधार पर वैरीफाई नहीं किया जा सकता।
वहीं उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने पहले ही एक पत्र लिखकर कहा था कि नगर पालिका लोनी के स्ट्रांग रूम पर सीसीटीवी कैमरों वाली कंपनी ने काम नहीं किया था। लिहाजा भुगतान के समय इस बात का संज्ञान रखने के निर्देश दिए गए थे। बताते हैं कि भुगतान के मामले में बड़ा पेंच तब फंसा जब कंपनी से निर्वाचन विभाग ने अपने रिकॉर्ड के लिए समस्त रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने को कहा। कई बार रिकॉर्डिंग के लिए कहा गया लेकिन कंपनी ने भुगतान के लिए तकाजा तो किया और निर्वाचन विभाग के रिकॉर्डिंग वाले तकाजे को इग्नोर कर दिया। यहां तक कह दिया कि रिकॉर्डिंग तो हम सीधे निर्वाचन कार्यालय को ही देंगे।
अब जब तक रिकॉर्डिंग निर्धारित फारमेट में निर्वाचन कार्यालय के पास नहीं आ जाएगी, तब तक वीडियोग्राफी वाले अधिकारी भुगतान नहीं करेंगे। रिकॉर्डिंग के फेर में 73 हजार रुपए की पेमेंट फंस गई है। सूत्र बता रहे हैं कि कंपनी अपने दोनों फाल्ट सही कर ले तो प्रशासन भुगतान के लिए तैयार बैठा है। जब अनुबंध जीएचएफ से हुआ है तो बिल हिना इंटरप्राइजेज द्वारा क्यों भेजा गया है। जब रिकॉर्डिंग उपलब्ध करानी है तो कंपनी को इसे देने में क्या देरी है। फिलहाल बिल और रिकॉर्डिंग के चक्कर में 73 हजार रुपए का पेमेंट फंस गया है।

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