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गोवा विस्फोट मामले में 6 लोग हुए बरी

पणजी| बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने शनिवार को गोवा मुख्यालय वाली सनातन संस्था से जुड़े 6 लोगों को दोषमुक्त करार दिया। इन पर एनआईए ने 2009 में दक्षिणी गोवा के मार्गो कस्बे में एक असफल हुए बम विस्फोट की साजिश रचने का आरोप लगाया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के वकील प्रवीण फलदेसाई ने संवाददाताओं से कहा कि विनय तालेकर, धनंजय अष्टेकर, प्रशांत अष्टेकर, विनायक पाटिल, प्रशांत जुवेकर और दिलीप मझगांवकर को ‘संदेह का लाभ’ मिला और उन्हें बरी कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “आज हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश द्वारा बम विस्फोट मामले में दोषमुक्त करार दिए गए आदेश के खिलाफ एनआईए की अपील पर फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने अपील सुनी और कहा कि आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाए।”

बता दें कि 16 अक्टूबर, 2009 को आरोपी मलगोंडा पाटिल और योगेश नाइक मार्गो में एक दिवाली पंडाल में आईईडी ले जा रहे थे, तभी इसमें दुर्घटनावश विस्फोट हो गया था और दोनों की मौत हो गई थी।

शुरुआत में मामले की की जांच गोवा पुलिस अपराध शाखा द्वारा की गई थी, लेकिन बाद में उसे एनआईए को सौंप दिया गया।

इस मामले में 11 व्यक्तियों पर साजिश में भाग लेने का आरोप लगाया गया था, जिसमें दो मृतक भी शामिल थे। वहीं तीन व्यक्ति अभी भी फरार हैं।

31 दिसंबर, 2013 को गोवा की एक विशेष अदालत ने मामले में सनातन संस्था को फंसाने के लिए एनआईए पर ‘हेरफेर’ करने का आरोप लगाते हुए तालेकर, धनंजय और प्रशांत अष्टेकर, पाटिल, जुवेकर और मझगांवकर को बरी कर दिया था।

वकील ने कहा, “हम गोवा और पूरे भारत में आतंक फैलाने के लिए इस विस्फोट को अंजाम देने के संस्थान के मकसद को साबित करना चाहते थे, लेकिन अदालत ने कहा कि कोई सबूत नहीं था।”

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