पाक जेल में बंद अपनों को लेकर गुजरात के 500 परिवार चिंतित

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अहमदाबाद (ईएमएस)| पुलवामा आतंकी हमले और भारतीय वायु सेना की एयर स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है और इससे गुजरात के करीब 500 परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिनके अपने पडौसी देश पाकिस्तान की जेल में कैद हैं| गिर-सोमनाथ जिले के मितियाज गांव में रहने वाली 65 वर्षीय जीविबेन कमलिया अपने 38 वर्षीय बेटे धीरू का इंतजार कर रही हैं| धीरू परिवार का इकलौता कमाने का वाला सदस्य था, जिसे पाकिस्तान मरीन ने चार महीने पहले अरेस्ट कर लिया था| यह घटना उस समय ही जब धीरू और कुछ अन्य लोग अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास मछली पकड़ रहे थे|
जीविबेन ने कहा कि जब से मेरे बेटे को पाकिस्तान ने पकड़ लिया तब से मेरा जीवन तब से दयनीय हो गया है| मुझे पता नहीं है कि पाकिस्तान उसे कब रिहा करेगा| हम बहुत गरीब हैं और आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है| मैं केवल यह आशा कर सकती हूं कि दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर हों ताकि मेरा बेटा सुरक्षित घर लौट आए| उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक राज्य सरकार से कोई मदद नहीं मिली है| मछली पकड़ने वाले समुदाय के नेता और पाकिस्तान-भारत शांति मंच और लोकतंत्र के कार्यकारी सदस्य जीवन जुंगी ने का कहना है कि जब भी दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध बिगड़ते हैं, गुजरात के मछुआरे इसका खामियाजा भुगतते हैं क्योंकि यह मछली पकड़ने की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करता है| उन्होंने कहा कि वास्तव में हम भारतीय मछली पकड़ने वाले लोगों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 16 मार्च को पाकिस्तान का दौरा करने वाले थे, जिन्हें साल 2003 से ही पाकिस्तान ने बंदी बना रखा है| पाकिस्तान की हिरासत में लगभग 1088 भारतीय मछुआरे हैं| इसके अलावा लगभग 500 भारतीय मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं| मार्च में पाकिस्तान उनमें से लगभग 137 को रिहा करने वाला था, लेकिन हाल ही में सीमा पार के घटनाक्रम ने परिदृश्य बदल दिया है| हमें भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार होने तक इंतजार करना होगा|