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5जी स्पेक्ट्रम की कीमत में कमी चाहती हैं जियो और एयरटेल

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारती एयरटेल और रिलायंस जियो इंफोकॉम ने सरकार से अगली नीलामी से पहले 5जी स्पेक्ट्रम की कीमत में कमी करने का अनुरोध किया है। जियो और एयरटेल के बीच इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज (आईयूसी) को लेकर विवाद है, लेकिन 5जी स्पेक्ट्रम के मूल्य के मुद्दे पर इनकी राय एकसमान है। भारती एयरटेल की होल्डिंग कंपनी भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राकेश भारती मित्तल ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कहा कि टेलीकॉम रेगुलेटर की ओर से 5जी स्पेक्ट्रम के लिए सुझाया गया रिजर्व प्राइस अन्य देशों की तुलना में सात गुना अधिक है।
जियो के डायरेक्टर महेन्द्र नाहटा ने मित्तल की राय से सहमति जताते हुए सरकार से 5जी स्पेक्ट्रम के प्राइस पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्राइस अधिक होने से 5जी नेटवर्क से टेलीकॉम कंपनियों को नुकसान होगा और इसे लॉन्च करने में देरी होगी।
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने पिछले वर्ष 3.3-3.6 गीगाहर्ट्ज बैंड में 5जी स्पेक्ट्रम के लिएबेस रेट 492 करोड़ रुपए प्रति यूनिट तय किया था।
इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के लिए 20 यूनिट के ब्लॉक में स्पेक्ट्रम खरीदना अनिवार्य किया गया था। इस वजह से एक टेलीकॉम कंपनी को देश भर में 5जी स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए कम से कम 9,840 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। अगर कोई टेलीकॉम कंपनी बड़े स्तर पर 5जी सर्विसेज को लॉन्च करने का फैसला करती है, तो उसे इसके लिए 100 यूनिट खरीदने पर लगभग 50,000 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा।
वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में कहा टेलीकॉम कंपनियों के पास नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने की क्षमता को सुनिश्चित करने के लिए रेगुलेटर को स्थिति बेहतर बनानी चाहिए।

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