देश
सीएम फडणवीस ने एकनाथ शिंदे के साथ उच्चस्तरीय बैठक में 19 योजनाओं की की समीक्षा
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार देर शाम एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया जिसमें प्रदेश में आगामी 19 महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई। यह बैठक मंत्रालय स्थित मुख्यमंत्री वॉर रूम में आयोजित की गई, और मुख्यमंत्री द्वारा इसकी अध्यक्षता की गई। बैठक में राज्य की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति और उनके कार्यान्वयन में तेजी लाने के उपायों पर गहन चर्चा की गई। आवश्यक निर्णय लेते हुए परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “राज्य सरकार का प्रमुख लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि महाराष्ट्र का समग्र विकास हो सके। इसके माध्यम से सरकारी नीतियों के द्वारा सभी क्षेत्रों में समान विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।” मुख्यमंत्री फडणवीस ने पालघर जिले में वधान बंदरगाह के विकास के लिए आवश्यक अनुमति और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज करने का भी निर्देश दिया।
शिंदे ने आगे लिखा, “बैठक में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार हेतु वैनगंगा-नलगंगा नदी लिंक परियोजना का सर्वेक्षण, वर्धा-नांदेड़ रेलवे लाइन और वडसा-गढ़चिरौली परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण, तुलजापुर मंदिर विकास योजना, छत्रपति संभाजीनगर जलापूर्ति योजना, और विरार-अलीबाग मल्टी-लेवल परियोजना जैसे में विविध सार्वजनिक उपयोगिता योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।”
उन्होंने बताया, “इस बैठक में राज्यभर में मेट्रो, रेलवे, राजमार्ग, हवाई अड्डे, बंदरगाह, सिंचाई, जलापूर्ति, स्वच्छता और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 19 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इस अवसर पर मुख्य सचिव सुजाता सैनिक, विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव तथा परियोजनाओं से संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।”
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बहादुर जवानों की वजह से बच गई थी 200 सांसदों की जान, जानिए 2001 की संसद पर हमले की कहानी
नई दिल्ली। करंट क्राइम। 13 दिसंबर 2001 का दिन था। सुबह करीब साढ़े 11 बजे उपराष्ट्रपति के सिक्योरिटी गार्ड उनके बाहर आने का इंतजार कर रहे थे, तभी एक सफेद एंबेसडर में सवार 5 आतंकी गेट नंबर-12 से संसद के अंदर घुसे। उस समय सिक्योरिटी गार्ड निहत्थे हुआ करते थे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, सिक्योरिटी गार्ड उस एंबेसडर के पीछे भागने लगे। उसी समय आतंकियों की कार उपराष्ट्रपति की कार से टकराई और हर तरफ हड़कंप मच गया। सुरक्षाकर्मी अलर्ट हो गए।
घबराए आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान पांचों आंतकी एके-47 और हैंडग्रेनेड से लैस थे, उनकी पीठ और कंधे पर बैग थे। पहली बार आतंक लोकतंत्र की दहलीज पार कर चुका था। देखते ही देखते लोकतंत्र का पूरा मंदिर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। आतंकियों के पहले हमले का निशाना वो चार सुरक्षाकर्मी बने जो एंबेसडर कार को रोकने का प्रयास कर रहे थे। इसी फायरिंग के बीच धमाके की आवाज आती है।
अब तक तस्वीर साफ हो गई थी कि संसद भवन में आतंकी हमला हो चुका है। इसके तुरंत बाद संसद भवन के सभी दरवाजे बंद कर दिए गए। अंदर मौजूद तमाम सांसद और मंत्रियों को महफूज जगह पर ले जाया गया। वहीं बाहर सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभाले हुए थे।
पांचों में से एक आंतकी ने गेट नंबर 1 से सदन के अंदर दाखिल होने की कोशिश की। लेकिन सुरक्षाबलों की गोली से वो ढेर हो गया। फिर बाकी चार आतंकियों ने गेटर नंबर 4 की तरफ बढ़ने की कोशिश की, वो वापस मुड़कर गेट नंबर 9 पर पहुंचे। लेकिन मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और पूरा ऑपरेशन गेट नंबर 9 के पास सिमट गया। यहीं मुठभेड़ में एक-एक कर तीन आतंकी ढेर हो गए। आखिरी बचा आतंकी गेट नंबर एक की ओर भागा, लेकिन गोली लगने से उसका खेल भी वहीं खत्म हो गया। संसद परिसर में ये खूनी खेल सुबह लगभग 11.30 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चला।
इस हमले में आतंकियों से लोहा लेते हुए संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 लोग शहीद हुए थे। फिर संसद पर आतंकी हमले की जांच दिल्ली पुलिस ने की और इस साजिश का पर्दफाश करने में कामयाब रही। जांच में पता चला कि आतंकियों को पाकिस्तान से गाइडेंस मिली थी। हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु, एसएआर गिलानी, अफशान गुरु और शौकत हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसएआर गिलानी और अफशान गुरु को बरी कर दिया। शौकत हुसैन की सजा कम कर दी गई। वहीं अफजल गुरु को फांसी की सजा हुई।
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संसद हमले की आज बरसीं, प्रधानमंत्री मोदी, नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत सांसदों ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
नई दिल्ली। करंट क्राइम। संसद पर आतंकी हमले की आज बरसी है। संसद परिसर में आज आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी समेत सभी वरिष्ठ सांसदों ने शहीद जवानों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
आज ही के दिन, 13 दिसंबर 2001 को संसद पर आतंकी हमला हुआ था जिसमें कुल 9 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। पांच आतंकियों ने 45 मिनट के अंदर लोकतंत्र के मंदिर को गोलियों से छलनी कर देश को दहला दिया था।
आज से ठीक 24 साल पहले लगभग अभी की तरह ही संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था। महिला आरक्षण बिल पर हंगामे के बाद सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर सदन को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद से जा चुके थे। लेकिन हमले के वक्त 200 से ज्यादा सांसद और मंत्री संसद के भीतर ही मौजूद थे।
इसी दौरान पाकिस्तान समर्थित पांच आतंकियों ने 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी करके पूरे देश को दहला दिया था।
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