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नोएडा

नोएडा में चार लोगों ने की आत्महत्या, उनमें छात्रा और विवाहिता भी शामिल, पुलिस जांच में लगी

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नोएडा। नोएडा के विभिन्न थाना क्षेत्रों में रहने वाले चार व्यक्तियों ने मानसिक तनाव के कारण अपने-अपने घरों में आत्महत्या कर ली। इन मृतकों में एक बीए की छात्रा, एक विवाहित महिला, एक ब्लड कैंसर से पीड़ित युवक और अन्य शामिल हैं। सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच कर रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, थाना फेस-दो क्षेत्र के याकूबपुर गांव में रहने वाली 17 वर्षीय कुमारी दीक्षा, जो संतोष कुमार की पुत्री हैं, ने मानसिक तनाव के चलते अपने घर में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी के अनुसार, पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। मृतका राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेक्टर-39 से बीए की प्रथम वर्ष की छात्रा थी। पुलिस को संदेह है कि उसने प्रेम संबंधों के कारण आत्महत्या की।

थाना बिसरख क्षेत्र की एक सोसाइटी में रहने वाले 34 वर्षीय वैभव नेगी, जो सुरेश पाल नेगी के पुत्र हैं, ने मानसिक तनाव के चलते अपने घर में जहरीला पदार्थ का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है।

अविभाजित थाना सेक्टर-39 क्षेत्र के छलेरा गांव में रहने वाली एक महिला ने पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद मृतका के भाई ने उसके पति के खिलाफ थाना में शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी निरीक्षक के अनुसार, वसीम, जो जनपद संभल का निवासी है, ने शिकायत दी है कि उसकी बहन फराह का निकाह 26 सितंबर, 2024 को मोहम्मद नाजिम से हुआ था। विवाह के बाद नाजिम और फराह नोएडा स्थित छलेरा गांव में रहने लगे। पीड़ित का आरोप है कि नाजिम उसकी बहन के साथ नियमित रूप से मारपीट करता था और शारीरिक तथा मानसिक उत्पीड़न करता था। पीड़िता ने पारिवारिक सदस्यों को भी इस बारे में बताया था। 5 जनवरी की रात परेशान होकर फराह ने आत्महत्या कर ली। थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि पीड़ित ने अपने जीजा नाजिम के खिलाफ मामला दर्ज कराया है और पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत जांच शुरू कर दी है।

इसके अलावा, थाना सेक्टर-39 क्षेत्र के सेक्टर-36 में एक 32 वर्षीय युवक ने कैंसर के कारण परेशान होकर आत्महत्या कर ली। थाना प्रभारी ने बताया कि दिल्ली के निवासी राहुल, जो राजेश का पुत्र है, सेक्टर-36 के ए-ब्लॉक में किराए पर रहता था। उसने देर रात अपने घर में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिवार से बातचीत करने पर पता चला कि वह ब्लड कैंसर से ग्रसित था।

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नोएडा

इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में लटकते मिली छात्र की लाश, पुलिस जुटी जांच में

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नोएडा। करंट क्राइम। नोएडा के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के तृतीय वर्ष के एक छात्र ने सुसाइड कर लिया है। छात्र की लाश उसके छात्रावास के कमरे में फंदे से लटकी मिली। छात्र की पहचान कृष्णकांत (25) के रूप में हुई है, जो झारखंड का निवासी है।
पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखा हैः “मैं हार मानता हूं”। अपना शरीर और अपना सारा सामान मेरे परिवार को सौंपता हूँ।
कृष्ण कांत के रूम मेट ऋतिक ने कहा कि कृष्णकांत ने दिन में पहले अपने पिता से बात की थी और कुछ ऐसा कहा था जिससे उन्हें चिंता हुई। घबराए पिता ने ऋतिक को फोन किया और उसे तुरंत अपने बेटे का हालचाल जानने के लिए कहा।

हृतिक उस समय हॉस्टल में मौजूद नहीं था, इसलिए उसने अपने एक परिचित को कमरे पर जाने को कहा। जब वह दोस्त कमरे तक पहुंचा तो पाया कि दरवाजा अंदर से बंद है और बार-बार खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार दरवाजे की कुंडी तोड़ी गई और कृष्णकांत कमरे के अंदर फंदे से लटका हुआ मिला।
पुलिस ने कहा कि मौत का कारण स्पष्ट रूप से तभी बताया जा सकेगा जब पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त होगी।

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नोएडा

प्रदूषण फैलाने वालों पर नोएडा अथॉरिटी ने शुरू की कार्रवाई, 15 लाख का लगाया जुर्माना

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नोएडा। करंट क्राइम। नोएडा ऑथोरिटी ने प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदूषण को रोकने के लिए अथॉरिटी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अथॉरिटी ने हवा के प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए 14 स्पेशल टीमें बनाई हैं, जो पूरे नोएडा इलाके में ग्रैप स्टैंडर्ड को सख्ती से लागू कर रही हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंस्ट्रक्शन साइट्स और यूनिट्स पर कार्रवाई करते हुए, अथॉरिटी ने अब तक कुल 14,95,000 रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। अथॉरिटी ने अलग-अलग जगहों से 12,199 टन से ज़्यादा मलबा इकट्ठा किया और उसे सुरक्षित रूप से डिस्पोज़ किया। अथॉरिटी की टीमें यह भी पक्का कर रही हैं कि कंटैमिनेशन को रोकने के लिए कंस्ट्रक्शन मटीरियल को ग्रीन नेट, मेट्रो शीट और ग्रीन कार्पेट से ढका जाए। ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
अधिकारियों ने बताया कि अथॉरिटी कंस्ट्रक्शन साइट्स से होने वाले धूल के प्रदूषण को रोकने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। नोएडा में, अलग-अलग कंस्ट्रक्शन साइट्स पर 88 स्टैटिक एंटी-स्मॉग गन और 10 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन चलाई जा रही हैं। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन और डेमोलिशन वेस्ट के साइंटिफिक डिस्पोज़ल के लिए सेक्टर 80 में 400 STP प्लांट सफलतापूर्वक चल रहा है।

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नोएडा

नोएडा एसीपी ने बिछुडी बच्चियों को परिवार से मिलाया

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नोएडा। करंट क्राइम। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर ने दो बिछुडे बच्चियों को परिवार से मिलाकर खुशियां लौटाई है। पांच साल और डेढ़ साल की दो बच्चियां अपने परिजनों से बिछड़ गई थीं। दरअसल, 5 दिसंबर को पीआरवी को सूचना मिली थी कि सेक्टर-126 में दो बच्चियां रोती हुई पाई गई। पूछताछ में पता चला कि दोनों बच्चियां केवल बंगाली भाषा समझती हैं। बातचीत में भाषा एक बड़ी समस्या बनी रही।
इसी दौरान एसीपी नोएडा जोन को जब इस मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने स्वयं बच्चियों से बातचीत की। प्रवीण कुमार सिंह बंगाली भाषा जानते हैं। उन्होंने दोनों बच्चियों से पूछताछ की तो बच्चियों ने हाजीपुर अंडरपास के बारे में बताया। फिर उन्होंने बच्चियों को परिजनों से मिलाया।
सीपी-प्रथम प्रवीण कुमार सिंह ने बच्चियों से बात की
इसी दौरान असिस्टेंट पुलिस कमिश्ननर-प्रथम ( सहायक पुलिस आयुक्त-प्रथम), नोएडा जोन, प्रवीण कुमार सिंह गश्त के दौरान थाना सेक्टर-126 पहुंचे। उन्हें जब इस मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने स्वयं बच्चियों से बातचीत की। चूंकि प्रवीण कुमार सिंह बंगाली भाषा जानते हैं, उन्होंने दोनों बच्चियों से अत्यंत स्नेहपूर्ण एवं संवेदनशील तरीके से बात की। पूछताछ करने पर बड़ी बच्ची ने बताया कि वह हाजीपुर अंडरपास से आगे का रास्ता पहचान सकती है।
एसीपी प्रथम प्रवीण कुमार सिंह, पुलिस फोर्स के साथ बच्ची द्वारा बताए गए रास्ते पर चलते हुए सेक्टर-133 स्थित लेबर कैंप पहुंचे, जो हाजीपुर अंडरपास से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। वहां पहुंचने पर पाया कि बच्चियों के परिजन उन्हें ढूंढते हुए अत्यंत परेशान स्थिति में इधर-उधर भटक रहे थे। सत्यापन के बाद बच्चियों को विधिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।

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