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वैज्ञानिक आर. चिदंबरम के निधन पर दुख प्रकट करते हुए मोदी ने कहा, उनके प्रयास आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे

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नई दिल्ली। पोखरण परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भारत के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार, डॉ. राजगोपाल चिदंबरम के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “डॉ. राजगोपाल चिदंबरम के निधन की खबर सुनकर मैं बहुत दुखी हुआ। वे भारत के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख निर्माताओं में से एक थे और उन्होंने हमारे देश की वैज्ञानिक और सामरिक क्षमताओं को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

 

डॉ. राजगोपाल चिदंबरम का शनिवार को 88 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। उन्होंने मुंबई के जसलोक अस्पताल में सुबह 3:20 बजे अंतिम सांस ली। उनका जन्म 11 नवंबर 1936 को चेन्नई में हुआ था। वे भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने पोखरण-1 (1975) तथा पोखरण-2 (1998) के परमाणु परीक्षणों में सक्रिय रूप से योगदान दिया।

 

 

चिदंबरम को 1975 और 1999 में क्रमश: पद्म श्री और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पोखरण परमाणु परीक्षणों के मुख्य वास्तुकार के रूप में, उन्होंने 1974 में बॉम्बे से पोखरण तक प्लूटोनियम ले जाने वाले सैन्य ट्रक में यात्रा की थी, जिसका खुलासा उन्होंने ‘इंडिया राइजिंग मेमोयर ऑफ ए साइंटिस्ट’ में किया था। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम 1974 से 1998 तक गुप्त रखा गया। चिदंबरम भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के निदेशक, परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव के रूप में भी कार्यरत रहे। इसके अतिरिक्त, वे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष भी रहे थे।

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वंदे मातरम पर जारी बहस के दौरान अखिलेश ने सरकार और बीजेपी पर साधा निशाना, कहा- ये राष्ट्रवादी नहीं, राष्ट्रविवादी है

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नई दिल्ली। करंट क्राइम। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में जारी बहस के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार खासकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद लोकसभा में अपना पक्ष रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि हर चीज का श्रेय सत्ता पक्ष लेना चाहता है। जो उनका नहीं उसका भी श्रेय लेते हैं। वंदे मातरम् गाने नहीं निभाने के लिए है।
अखिलेश ने कहा कि ये लोग देश को तोड़ना चाहते हैं। ये दरारवादी लोग देश तोड़ना चाहते हैं। इन लोगों ने आजादी की लड़ाई में भाग नहीं लिया है। कुछ लोग अंग्रेजों के लिए जासूसी करते थे।
अखिलेश ने कहा कि ये लोग वंदे मातरम् का महत्व क्या जानेंगे। आजादी के बाद इन्होंने वंदे मातरम् नहीं गाया। ये लोग राष्ट्रवादी नहीं राष्ट्रविवादी हैं।
मुखबिरों से पूछो तिरंगा क्यों नहीं फहराया..? गलत लोगों की गलत मंशा देश समझता है।

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LIVE: PM Modi’s remarks in the Lok Sabha during special discussion on 150 years of Vande Mataram

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लोकसभा में प्रधानमंत्री आज करेंगे वंदे मातरम् पर चर्चा की शुरुआत तो राज्य सभा में अमित शाह, हंगामे के आसार

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नई दिल्ली। करंट क्राइम। राष्ट्रीय गीत ’वंदे मातरम’ की रचना को 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर आज यानि सोमवार को संसद में विशेष बहस होगी। आज दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में इस बहस की शुरुआत करेंगे। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी वंदे मातरम् पर चर्चा होगी, जिसकी शुरुआती गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। चर्चा के दौरान हंगामे के भी आसार हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री ने पहले ही कांग्रेस पर गीत के छंद हटाने का आरोप लगाया है।
लोकसभा की कार्यसूची में ’राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा’ को सोमवार के लिए सूचीबद्ध है और बहस के लिए 10 घंटे का समय आवंटित किया गया है। पीएम मोदी इस बहस की शुरुआत करेंगे, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दूसरे वक्ता होंगे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी समेत कई सांसद हिस्सा लेने की उम्मीद हैं।
लोकसभा के बाद राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर मंगलवार को चर्चा होगी, जहां गृह मंत्री अमित शाह चर्चा की शुरुआत करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री तथा राज्यसभा में नेता जेपी नड्डा दूसरे वक्ता होंगे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में 2 दिसंबर को सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं की बैठक में इस विषय पर चर्चा की सहमति बनी थी। बैठक में तय हुआ कि ’वंदे मातरम’ और चुनाव सुधारों पर अगले हफ्ते बहस होगी, जिससे संसद के सुचारू संचालन की संभावना बढ़ गई है. हंगामे की बजाय सकारात्मक चर्चा की उम्मीद की जा रही है।
’वंदे मातरम्’ को 1870 के दशक में महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा था। ये गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ’आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसका पहला प्रकाशन 1882 में हुआ था। इस गीत को जदुनाथ भट्टाचार्य ने संगीतबद्ध किया था।

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