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इलाज के अभाव में 20 साल के बेटे ने तोड़ दिया दम

क्या कोई समझ पायेगा उस गरीब मां का गम
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कोरोना काल में सबसे बड़ा काल यह समय उन लोगों के लिए बना है जो अन्य बीमारियों से ग्रस्त होकर जान दे रहे हैं। मगर यहां तो लोग संभावित कोरोना से मर रहे हैं और अस्पताल इलाज भी नहीं कर रहे हैं। लोगों को उपचार नहीं मिल रहा है और उनकी मौत अस्पताल के दरवाजों पर हो रही है।
जो लोग साधन सम्पन्न हैं वो कोरोना से मर गये लेकिन अंतिम संस्कार के समय सरकारी इंतजाम ने दाह संस्कार की दुर्गति करा दी। क्या कोई जनप्रतिनिधि, कोई अधिकारी आगे आकर जिम्मेदारी लेगा या फिर मरने की पूरी जिम्मेदारी मरने वाले की होगी। गुरूवार को बेहद दर्दनाक घटना कल्लूपुरा मौहल्ले में हुई जहां 20 साल के युवक ने देखते ही देखते दम तोड़ दिया। युवक को उसकी मां इलाज के लिए इस अस्पताल से उस अस्पताल तक दौड़ी मगर किसी भी अस्पताल ने उसके बेटे को इलाज के लिए भर्ती नहीं किया। एक घंटे के भीतर युवक की मौत हो गयी। युवक को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई थी और वह अपने घर से पैदल खुद चलकर गया था लेकिन एक घंटे बाद उसकी मां ई-रिक्शा में उसकी लाश लेकर लौटी।
किसी अस्पताल ने युवक के मरने के बाद एम्बुलेंस नहीं दी। जीते जी उसका इलाज नहीं किया। युवक को सांस लेने में परेशानी हुई थी और उसके बाद युवक का दाह संस्कार भी कर दिया गया। बड़ी बात यह है ना तो मृतक के कोरोना पॉजिटिव होनेकी पुष्टि हुई और लक्षण सारे वही थे। जो लोग प्रभाव में आये उनकी कोई जांच नहीं हुई और मृतक का दाह संस्कार भी हो गया। सवाल यह है कि क्या गरीब को इलाज नहीं मिलेगा। क्या दलित बस्तियों के ये जवान बच्चे ऐसे ही जीवन छोड़कर परलोक सिधार जायेंगे। इलाज देना किसकी जिम्मेदारी है। गरीब मां ने अपने कलेजे पर पत्थर रख लिया। उसका जवान बेटा उसकी आंखों के सामने दुनिया छोड़कर चला गया।

चार दिन पहले भी यहां हुई थी कोरोना से मौत

20 वर्षीय युवक को अचानक ही सांस लेने में परेशानी हुई और वह अपने कदमों पर चलकर इलाज के लिए गया। इलाज नहीं मिला और वह लाश बनकर घर वापिस लौटा। जिस इलाके में यह मामला हुआ है वहां चार दिन पहले ही भाजपा के एक पूर्व पार्षद के भाई का भी निधन हुआ था। यह मृत्यु भी कोरोना से बताई जाती है। मृतक को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन बताते हैं कि जब उसकी मृत्यु हो गई तो परिजनों को अस्पताल द्वारा शव नहीं दिया गया था और यह कह दिया गया था कि कोरोना पीड़ित था इसलिए आप लोग सीधे शमशान घाट पहुंचे। मृतक का दाह संस्कार भी पीपीई किट पहनकर किया गया था और इसके लिए अलग से व्यवस्था की गयी थी। इस इलाके में पहले भी केस मिले हैं और सवाल फिर यही उठ गया है कि क्या मलिन और दलित बस्तियों के गरीबों को इलाज नहीं मिलेगा।

जीवित को नहीं मिला इलाज और मरने के बाद एम्बुलेंस भी नही

सरकार लाख दावे करे और प्रशासन कुछ भी कहे लेकिन कल्लुपूरा की ये घटना बता रही है कि गरीब को इलाज नहीं मिल रहा है। कल्लुपुरा में रहने वाले 20 वर्षीय दीपांशु घर में अपनी मां के साथ बैठा था और अचानक उसे सांस लेने में परेशानी हुई। मां से उसने कहा और इसके बाद वह खुद घर से अपनी मां के साथ पैदल ही इलाज के लिए चला। वीडियो में वह बनियान पहने हुए इलाज के लिए जा रहा है। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उसकी मां सबसे पहले उसे चन्द्र लक्ष्मी अस्पताल लेकर पहुंची और इसके बाद संतोष कोविड अस्पताल पहुंचे। बताते हैं कि यहां अस्पताल ने इलाज देने से इंकार किया और फिर पौदार नर्सिंग होम गये और यहां भी युवक को भर्ती नहीं किया गया। ऐसा युवक की मां का कहना है। अब उसकी मां उसे सर्वोदय अस्पताल लेकर पहंची और यहां पर जब डॉक्टरों ने उसे देखकर मृत होने की बात कही तो युवक की मां गश खाकर वहीं गिर पड़ी। जिस 20 साल के बेटे को वह घर से हाथ पैरों पर सलामत लेकर निकली थी वह बेटा दुनिया छोड़ चुका था। यहां पर अमानवीयता की हद ये हुई कि एक मां का 20 वर्षीय बेटा मर चुका था और उसे इलाज नहीं मिला था लेकिन मरने के बाद भी लचर व्यवस्था का तांडव जारी था। मां अपने बेटे की लाश को लाने के लिए एम्बुलेंस तलाशती रही मगर एम्बुलेंस नहीं मिली। आखिर में गरीब के बेटे की लाश ई-रिक्शा में घर पहुंची और फोल्डिंग पलंग पर लाश को रखकर घर तक लाया गया।

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