रविशंकर प्रसाद ने की थी विवादित भूमि रामलला को देने की पैरवी

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नई दिल्ली (ईएमएस)। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसले का कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने स्वागत किया है। इस मामले में रोचक बात यह है कि करीब 10-12 साल पूर्व खुद उन्होंने भी इस केस की इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के समक्ष जोरदार पैरवी की थी और विवादित भूमि को रामलला विराजमान को देने के पक्ष में तर्क रखे थे। सर्वोच्च अदालत ने आखिर इन तर्को पर मुहर लगा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ जब इस मामले की सुनवाई कर रही थी तब भाजपा केंद्र या राज्य में सत्ता में नहीं थी। प्रसाद तब वकालत करते थे और वह रामलला विराजमान की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे थे। प्रसाद ने तब हाईकोर्ट की तीन जजों की खंडपीठ के समक्ष मामले में जिरह की थी। उन्होंने विवादित 2.77 एकड़ भूमि को रामलला विराजमान को देने का अनुरोध कोर्ट से किया गया था। उन्होंने कोर्ट से कहा था कि रामलला देव हैं। भारत की संस्कृति में वे अवतार पुरुष हैं तथा उनका सम्मान होना चाहिए। इस जमीन पर उन्हीं का हक बनता है। हालांकि तब हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया था उनमें विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने को गया।