फर्जी अंक-पत्र पर 33 साल रेलवे में नौकरी करती रही महिला गिरफ्तार

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नई दिल्ली (ईएमएस)। रेलवे में एक महिला ने 10वीं पास का फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी हथियाने का मामला सामने आ रहा है। प्रोन्नति पाकर वह कार्यालय अधीक्षक के पद तक पहुंच गई, मगर महिला के भतीजे ने भर्ती होने के 33 साल बाद सारा मामला ही खोल कर रख दिया। इसके बाद पहाड़गंज पुलिस ने 16 अक्तूबर को 59 साल की कमलेश देवी को गिरफ्तार किया है। पहाड़गंज थाने में बीते साल नवंबर में कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मामला 53 साल के सुभाष की तरफ से दर्ज कराया था। एफआईआर में कहा था कि कमलेश देवी वर्ष 1986 में चतुर्थ श्रेणी के पद पर रेलवे में भर्ती हुई थीं, लेकिन असलियत में वह छठीं पास ही हैं। अपने दावे के समर्थन में सुभाष ने उन शिक्षण संस्थानों से सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जवाब की प्रति भी लगाई थी, जिनमें आरोपी महिला ने शिक्षा लेने का दावा किया था। सूत्रों के अनुसार महिला ने प्रौढ़ स्कूल का प्रमाण पत्र लगाया था। करीब 11 माह की जांच के बाद पुलिस ने महिला को किनारी बाजार मोरी गेट से गिरफ्तार किया है।

  • भतीजे ने बदला लिया
    इस मामले की पैरवी करने वाला सुभाष आरोपी महिला कमलेश देवी के सगे भाई का बेटा है। आनंद पर्वत इलाके में कमलेश देवी का सुभाष के पिता से संपत्ति विवाद चल रहा था। वर्ष 1990 में सुभाष की शादी तय हुई। उसने अपनी बुआ से उसके घर में सामान रखने की अनुमति मांगी, मगर बुआ ने गैरकानूनी तरीके से घर में घुसने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज करा दिया। जब पुलिस ने सुभाष को गिरफ्तार किया, तब वह नेवी में सेलर की नौकरी ज्वाइन करने वाला था, मगर गिरफ्तार के कारण उसका करियर खत्म हो गया। वहीं, इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसके छोटे भाई ने आत्महत्या कर ली। आर्थिक तंगी के कारण सुभाष अपनी पत्नी का इलाज तक नहीं करा पाया, जिसकी वजह से वे संतान सुख से वंचित रह गए। उसका पूरा परिवार तबाह हो गया।