जुबान संभाल के
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विधायक जी हो गये तेज स्पीड चलने वाले मंडल प्रधान से नाराज
विधायक जी ऐसे हैं कि क्या बताएं दिल के बहुत अच्छे हैं। लेकिन जब फूल वाले झंडा उठाकर चले तो विधायक जी को मंडल वाले का फंडा बिल्कुल समझ नहीं आया। बताते हैं कि विधायक जी चुप भी नहीं रहे और बता दिया कि आर्इंदा ऐसा काम ना हो। दरअसल मंडल में तिरंगा यात्रा निकलनी थी और सीन कुछ ये बना कि सांसद, विधायक दोऊ खड़े, किसकी पहली मानूं वाला हो गया। सांसद जी ने घड़ी दिखाई और मंडल प्रधान ने तिरंगा यात्रा को झंडी दिखा दी। मिनटो का फर्क था और विधायक जी भी आ गये। सुना है कि फिर एक आदेश पर तिरंगे वालों ने बैक गियर डाल और वापस आये। फिर यात्रा शुरू हुई। मौहल्ले वाले बता रहे हैं कि सीन तो कुछ ये था कि तू अब दिख मत जाना आज। लेकिन बस इतना समझा दिया गया कि ये हिमाकत दोबारा नहीं होनी चाहिए और कोई भी आ जाये हमारा इंतजार होना चाहिए।
हमारे नारे भी उन्हें नहीं सुनाई दिये और हम भी दिखाई नहीं दिये
हाऊस टैक्स ने सबके होश उड़ा दिये हैं। पेट्रोल पम्प वालों का हाऊस टैक्स 50 लाख से ऊपर का आ गया है तो बैंकट हॉल वाले लाला जी भी लाखों रूपये के बिल से परेशान हैं। रहनुमाओं से तो अब उम्मीद रही नहीं। लिहाजा सरकार वालों के दरवाजे अब बाजार वाले जा रहे हैं। व्यापार मंडल इकट्टे हो गये हैं और व्यापार मंडल वाले भी हैं तो फूल वाले ही। कभी इन्हीं व्यापारियों ने फूल वालों के नारे लगाये थे और जब ये व्यापारी नारे लगाते हुए टैक्स कम कराने को लेकर पहुंचे तो वो सरकार से नहीं उनके व्यवहार से हैरान हैं। वो बता रहे हैं कि पहले हमने ग्राउंड फ्लोर पर नारे लगाये। जब किसी ने ना सुनी तो ऊपर जाकर नारे लगाये। मगर हमारा दिल तो उस समय बैठ गया जब निगम के सदन की मुखिया ने हमें देख कर मुंह फेरा और बहुत तेजी से वहां से निकल गर्इं। बताओ भाई साहब कभी इनके लिए हमने नारे लगाये थे और अब इन्हें ना हमारे नारे सुनाई दे रहे और ना हम दिखाई दे रहे। व्यापारी भी इस व्यवहार से दंग बताये जाते हैं।
कथा वाले अगर पहाड़ पर हैं तो नदी पार वाले भी गंगा में स्रान कर रहे हैं
लोकसभा वालों की कहानी तो ये है कि पूरा चुनाव उन्होंने योगी मोदी करके जीत लिया। किसी ने पूछा क्या किया है तो एक ही जवाब, योगी जी-मोदी जी। किसी ने पूछा क्या करोगे तो फिर वही बात दोहरा दी कि योगी जी-मोदी जी। लेकिन नदिया के उस पार वाले और लाईन के इस पार वाले को इन दो नामों से ज्यादा ऊपर वाले पर यकीन है। वो मथुरा गये तो अध्यक्ष बन गये। दूधेश्वर नाथ में आये तो विधायक बन गये और अब सुना है कि बद्रीनाथ पहुंचकर मंत्री बनने की आहुतियां दी जा रही हैं। लेकिन पहाड़ पर जाकर कथा करने वाले इस बात को समझ लें कि नदिया पार वाले भी गंगा नदी में पहुंच गये हैं। उन्होंने भी प्रथम देवता मां का हाथ थामा है और लोकेशन हरिद्वार और ऋषिकेश की है। अगर तुम्हें वृदांवन और दूधेश्वर नाथ से कुछ मिला है तो उन्हें भी मां के आशीर्वाद से कैबिनेट मिली है। अब ये देखना है कि किसकी भक्ति में कितनी शक्ति है।