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जुबान संभाल के

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जिसकी नहीं है चर्चा उस नाम का खुल सकता है महामंत्री वाला पर्चा
गांव जब बसेगा, तब बस जायेगा। लेकिन जुलाओं में लट्ठम- लट्ठा हो रही है। फूल वालों के यहां एक दूसरे की जड़ों में मट्ठा देने का काम चल रहा है। सबसे ज्यादा जोर इस बात पर नहीं है कि मेरा नाम आ जाये। बल्कि पूरा जोर इस बात पर लगाया जा रहा है कि फलाने का नाम ना आ जाये। कहानी में एक नया मोड़ आ गया है और सुना है कि जिस नाम का चर्चा हो रहा था उस नाम का पर्चा होल्ड होने वाला सीन बन रहा है। यहां नाम तो हर बार की तरह चौहान का भी है। रजापुर वाले बाल्मिकी का भी है और वसुंधरा वाले संत भी हैं। मगर कहानी का ये अंत नहीं है और ऊपर बता दिया गया है कि हर बार चौहान ठीक नहीं और संत जब राष्टÑीय कार्यकारिणी में है तो उनकी महानगर वाली इच्छाओं का अंत क्यों नहीं होता। लाईन पार वाले तो लहर में मौहल्ला चुनाव हार गये तो उन पर कृपा किस बात की। बताया जाता है कि अब दलित वाले कोटे से जो नाम फलित होने की चर्चा चल रही है वो नाम वेदों से प्रकाश में आया है और यह जाटव समाज का नाम है। सुना है बनाने वाले नाने पर लगे हैं और बिगाड़ने वाले बिगाड़ने पर लगे हैं। हिस्ट्री खंगाल ली गई है और बताया जा रहा है कि ये वाले भगवा दलित तो बिल्डर हैं और वैसे भी नये आये हैं। मगर फूल वाले बता रहे हैं जिस नाम की चर्चा अभी तक नहीं थी उस नाम का महामंत्री वाला पर्चा खुल भी सकता है। आप देखते रहिये।

एक हफ्ते के हैं प्रवासी, मगर महानगर वाले ही देंगे आशीर्वाद वाली शाबाशी
फूल वालों के यहां इन दिनों सियासी फैशन हर चीज को ईवेंट बनाने का चल रहा है। बूथ अध्यक्ष बने तो मौहल्ले में ढोल बजा, घर के बाहर नेम प्लेट लगी। अब मंडल वाली टीम बननी है तो सीन पूरे गाजे बाजे का है। मंडल के महानगर प्रवासी अलग और जिले के प्रवासी अलग, हर मंडल के प्रवासी अलग। और फिर प्रवासियों के पीछे भागती फूल वालों की एक भीड़ अलग। मगर जो गेम के खिलाड़ी हैं वो जानते हैं कि मंडल वाले प्रवासी का वीजा एक हफ्ते का ही है। कोई उनसे पद मांगने की गलतफहमी ना पाले। पता चला है कि नखरे उधर से भी कम नहीं दिखाये गये हैं। वहां भी कह दिया गया कि अगर आप उनकी लिस्ट के हो तो उनसे मेरे को फोन कराओ। मंडल अध्यक्ष ने कह दिया कि एक हफ्ते में मंडल से नाम आयेंगे। सीन ये है कि मंडल वाली टीम ने वार्ड के पार्षद के नाम अलग हैं, विधायक जी के नाम अलग हैं और सुना है एक दो नाम सांसद जी के भी आयेंगे। कहानी का ट्विस्ट ये है कि पॉवरफुल योद्धा ने कह दिया है कि कहीं भी घूम लो, फाईनल तो नेहरूनगर वाले दफ्तर से होना है और ये भी सामुहिक होना है। महानगर प्रभारी एक नाम बतायेंगे, अध्यक्ष का नाम आयेगा। मंडल अध्यक्षों की लिस्ट आयेगी। पुराने भाजपाई ने कहा कि मंडल के लिए ऐसा दंगल पहली बार देख रहे हैं।

ये हुआ है विकास, जब पार्षद के आगे ठेले वाले जोड़ रहे हैं हाथ
100 मौहल्लों में लहर का कहर अब पूरा शहर झेल रहा है। गली मौहल्ले से लेकर बाजार तक से आखिर क्यों ये ऊगाही की आवाजें सुनाई दे रही है। ऐसा क्या है कि ठेले वाले पटरी वाले पार्षद के हाथ जोड रहे है। अगर यही सबका साथ सबका विकास है तो फिर ऐसे साथ से तो हाथ जोड लेना ही ठीक। किस्सा पुल के नीचे खड़े भगवा पार्षद का है। वो फिल्मी स्टाईल में आकर खडे हुए और सबसे पहले पान वाले ने उन्हें पान पेश किया और हाथ जोडे। फिर ठेले वाले ने पेय पदार्थ दिया, जिसे पार्षद जी ने रिजैक्ट कर दिया। हद तो तब हो गई जब ठेली पर समान बेचने वाली महिला हाथ जोड़ते हुए पार्षद के सामने आई। पता चला कि ये सीन कोई जनसुनवाई का नहीं है, बल्कि ये सीन वार्ड की उगाही का है। पार्षद जी से बैर का मतलब है कि यहां ठिया विलोपित हो जायेगा और बुल्डोजर चल जायेगा। अगर पार्षद जी से मेल मिलाप रखोगे और उनका ध्यान रखोगे तो फिर वो तुम्हारा ध्यान रखेंगे। क्योंकि उनकी नीति है कि सबका और सबका विकास।

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उत्तर प्रदेश

नोएडा में रिवर्स करते समय बच्चे पर चढाई कार, अस्पताल ले जाते समय हुई मौत, महिला चालक गिरफ्तार

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नोएडा। करंट क्राइम। नोएडा में एक दर्दनाक हादसे में कार की टक्कर लगने से बच्चे की मौत हो गई। सेक्टर-31 में यह घटना घटी। घटना बुधवार रात की है, जब एक कार रिवर्स लेते समय पीछे से गुजर रहे बच्चे को टक्कर मार दी। घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के मुताबिक यह हादसा सेक्टर-31 के ए-ब्लॉक में हुआ। सेक्टर-20 थाना प्रभारी डी.पी. शुक्ला ने बताया कि कार चालक की पहचान जयंती शर्मा के रूप में हुई है।


उन्होंने बताया कि बुधवार रात जयंती शर्मा अपनी कार रिवर्स कर रही थी, तभी पीछे से गुजर रहा चार साल का बच्चा उनकी गाड़ी की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बच्चे को गंभीर चोटें आईं और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि बच्चे के पिता, आशीष, की शिकायत पर सेक्टर-20 थाने में मामला दर्ज किया गया है। गुरुवार सुबह पुलिस ने आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया और दुर्घटना में शामिल वाहन को जब्त कर लिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में आवासीय गलियों में अक्सर कारें बिना देखे रिवर्स की जाती हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है और घटना स्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि हादसे के वक्त वाहन की गति कितनी थी।

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भगवा नगरी में कौन चल रहा है पांच कारों के काफिले के साथ
अगर केन्द्र से लेकर प्रदेश तक सरकार हो और ऐसे में पद मिल जाये तो फिर कद अपने आप बढ़ जाता है। कद बढ़ता है तो कई बार कद वाले भी हद कर देते है। सुना है कि इन दिनों भगवा नगरी में एक नेता जी का गुजारा एक कार से नहीं हो रहा है। वो चाहते हैं कि जब वो चलें तो कारों का काफिला चले। जब वो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो कार का हूटर बजे। सुना है कि उन्होंने कार चालक को इस बात के निर्देश दे दिये हैं कि जब भी हम कार्यक्रम में पहुंचे तो एन्ट्री से पहले ही हूटर बजना शुरू हो जाना चाहिए। बताते हैं कि काफिले का सिलसिला कठोरता से लागू हो रहा है। अगर काफिले में चार गाड़ी हैं और एक गाड़ी कहीं रास्ते में रूक जाये तो चार कारें रूक कर उसका 10 मिनट इंतजार करेंगी। बताते हैं कि नेता जी के नए शौक की खबर ध्वज प्रणाम वालों तक भी पहुंच चुकी है। वो भी हैरान हैं कि इतनी दीक्षा देने के बाद भी पता नहीं कौन ऐसा गुरू इन्हें मिल गया जो कार वाली शिक्षा का पाठ ठीक से पढ़ा गया है।
किस विधानसभा में उठेगी इस बार गुर्जर समाज की टिकट भागीदारी की मांग
चुनावी रण का गेम ऐसा है कि हाथ वाले और साईकिल वाले तो अभी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि पहले हमारे दोनों सम्राट ही तय कर लें कि हमें लड़ना है या चुनाव लड़वाना है। पता चला कि शेरवानी हमने खरीदी और ऐन मौके पर दूल्हा ही बदल गया। महावत अच्छी तरह से समझ गये हैं कि हाथी कितने पानी में है। लेकिन फूल वालों ने एक दूसरे की राहों में शूल बोने की पूरी तैयारी कर ली है। सूत्र बताते हैं कि इस बार नदिया पार के चाणक्य की राहें इतनी आसान नहीं हैं। यहां से गुर्जर दावेदारी की मांग उठेगी और इसी बीच में पूर्वांचल वाला रिमीक्स सीन आयेगा। जो फिलहाल चुनावी रणनीति बनाकर चल रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि स्टोरी में ट्विस्ट आयेगा। गुर्जर माहौल बनायेगा और टिकट ठाकुर के पास शिफ्ट हो जायेगा। लेकिन बताने वाले बता रहे हैं कि इस रण में गुर्जर चेहरा दावेदारी के लिए अड़ेगा और अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हो गया। तो फिर ठाकुर चेहरा ही चुनाव लड़ेगा। बाकी तो ये है कि होई है सोई, जो राम रचि रखा। वक्त के पासे पलटते हैं तो सारी चाणिक्यगिरी धरी रह जाती है।
बोले थे वो अवर अभियन्ता, सुनो मैम्बर तुम मत करो गुणवत्ता की चिंता
विकास की पहली र्इंट लगती है और शिकायतों के रोड़े उससे पहले आ जाते हैं। जो पार्षद बड़ी मुश्किल से आर्ट साईड लेकर दसवीं और बारहवीं में थर्ड डिविजन से पास हुए हैं वो सिविल इंजीनियर बनकर आ लेते हैं। वो बताते हैं कि गुणवत्ता बड़ी खराब है। अजी काम बड़ा घटिया है। अजी ये तो सड़क उखड़ रही है। नाली, सीवर वाले महकमें के एक टेंडर मैन ने कहा कि विकास पर बिल्कुल भी नहीं आयेगी आंच अगर पहली र्इंट रखते ही पहुंचा दें उन्हें तीन से पांच। टेंडर मैन ने कहा कि हमें कोई दिक्कत नहीं है और हमारा तो ये रूल है कि ऐसे कैसे जाने देंगे। हम भी खायेंगे और तुम्हें भी खाने देंगे। मगर फूल वालों के साथ समस्या ये है कि बिल बनने से पहले ही उन्हें कमीशन चाहिए। उन्होंने महकमें के एक पुराने अवर अभियन्ता का नाम लिया और बताया कि एक पार्षद उनके पास बिल रूकवाने के लिए पहुंचा था। ये अवर अभियन्ता का दिल था कि उसने साफ कह दिया कि सुनो पार्षद तुम टेक्निकल नहीं हो जो गुणवत्ता का पैमाना हमें बताओगे। रही बात शिकायत की तो वो तुम्हारा काम है और हमें पता है तुक कहां तक जाओगे। इसके बाद उसने बिल भी बनाया, बिल पास भी कराया और पार्षद को फेल कर दिया था।

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दीवार मत पोतना मेरे भाई, यहां हो जाती है इसी बात पर विदाई
दीवारों से लेखन का ऐसा नाता है कि जिन्होंने दीवारों पोती हैं वो जानते हैं कि इसका क्या नतीजा आता है। गाजियाबाद में दीवार पर लिखना ये मानों की अपनी सियासत की फेयरवेल लिखना है। बसपा के सतपाल चौधरी, रविन्द्र चौधरी ने दीवारें पोतीं और हाथ में आया टिकट कट गया और आज वो कहां हैं, याद करो। बाकी सब को छोड़ो और सेना वाले साहब ने दीवार ही पोती थी और फिर वो हुआ कि विदाई हो गई और अब वो बहुत दूर रहते है। सुना है वन नेशन-वन इलैक्शन वालों ने दीवारें पोतने के लिए कलर उठा लिये हैं। पुराने भाजपाई ने फोन करके नए भाजपाई को समझाया और उन्हें बताया कि केवल इन्हीं नामों पर मत जाना। मेरी बात झूठ लगे तो वीरेश्वर त्यागी से लेकर मयंक गोयल से पूछ आना। उन्होंने दीवारें ही दावेदारी में पोतीं थी और फिर चुनाव कोई और ही लड़ा था। इसलिए ज्यादा इमोशन में मत आना। तू बस वन नेशन-वन इलैक्शन के नारे लगाना।

सरकार किसी की भी रहे लेकिन कार्यकर्ताओं की तकरार रहेगी
पहली बार सरकार आई तो तूफान ही आ गया। लेकिन लहर वालों को इसी शहर में पता चल गया कि सरकारों के बदलने से सरकारी दफ्तरों में सिस्टम नहीं बदलता है। पूरे पांच साल ये देवतुल्य हर आने वाले बड़े नेता के आगे इसी बात को रखते रहे कि हमारी कोई सुन नहीं रहा। सरकार रिपीट हुई लेकिन ना सुनने वाली हीट कम नहीं हुई। सरकार जिनकी है उन्हें एक पटवारी से लेकर दरोगा पर कार्यवाही कराने के लिए पूरे जोर लगाने पड़ते हैं। कहने वाले ने कहा कि हमने माना सरकार आॅफ फूल है लेकिन आप ये भी मानकर चलो कि रूल इज रूल है। एक विधायक को कितने लैटर लिखने पड़े, ये सबने देखा। 40 पार्षद निगम में एक जुट हो रहे हैं और कमाल ये है कि ये सब के सब सरकार के पार्षद हैं। इसलिए सरकार कितनी बार रिपीट हो लेकिन अफसरों की चली है और चलेगी। रही बात तकरार की तो वो रही है और रहेगी।

अब क्या होगी कृपा वाली बरसात, जब निकल गया है आधा कार्यकाल
सरकार रिपीट हुई और देवतुल्यों की हार्टबीट इस बात पर बढ़ गई कि अब सरकारी कृपा का बादल किसके घर पर बरसेगा। मौसम बदल गये लेकिन कुछ भी नहीं बदला। जो पहली सरकार में जीडीए बोर्ड सदस्य थे वो दूसरी सरकार में आधा कार्यकाल बीत जाने के बाद भी बोर्ड मैम्बर हैं। दर्जा प्राप्त वाली कृपा एक्सप्रेस गाजियाबाद में रूकी ही नहीं। जिनके नाम की चर्चा दर्जा प्राप्त वालों में हो रही थी। उन्हें फिर एयरपोर्ट एडवाईजर कमेटी का मैम्बर बनने में कोई हर्जा नहीं लगा। अब फिर से ये चर्चा हो रही है कि फलाने को ये मिलेगा और अलाने को ये मिलेगा। लेकिन कहने वाले ने कहा कि अब मिलने से भी क्या लाभ है। बेकार में अपने नाम का ठप्पा भी लगवा लें और कुछ होना भी नहीं है। उसने कहा कि किस बात की कृपा होगी और किस बात का हम भौकाल बनायेंगे। सबको पता है कि आधा कार्यकाल बीत चुका और आधा भी ऐसे ही बीत जायेगा।.

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