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क्या बज गया है एमएलसी स्रातक शिक्षक चुनाव का बिगुल

– 28 नवम्बर को हो सकता है विधान परिषद के लिए मतदान
वरिष्ठ संवाददाता (करंट क्राइम)
गाजियाबाद। एमएलसी चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गयी है उससे पहले जिला पंचायत चुनाव ने भी दस्तक दे दी है। गाजियाबाद को भगवा गढ़ कहा जाता है और एमएलसी चुनाव में इस बार रोनक यहां से होनी है। क्योंकि यहां से भाजपा ने स्रातक उम्मीदवार के लिए आरकेजीआईटी के चेयरमैन दिनेश गोयल को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा यहां संगठन स्तर से पूरी तरह चुनावी गेम को अपने पक्ष में करने के लिए जोर लगा रही है।
बहरहाल इन सब के बीच खबर ये है कि एमएलसी चुनाव का बिगुल बज गया है। हालांकि चुनावी पुष्टी आयोग की तरफ से होनी बाकी है लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि विधान परिषद सदस्य चुनाव के लिए काउंट डाउन शुरू हो चुका है। अधिसूचना विधिवत रूप से जारी होनी बाकी है लेकिन तैयारी पूरी हो चुकी है। सूत्र बता रहे हैं कि 28 नवम्बर को विधान परिषद सदस्य सीट के लिए मतदान होगा। मतदान स्रातक और शिक्षक कोटा सीट के लिए होना है। गाजियाबाद में भी मतदान के केन्द्र बनाये गये हैं। बताया जा रहा है कि 23 नवम्बर को नामांकन हो सकता है और 24 व 25 नवम्बर को आपत्ति और नाम वापस लिए जायेंगे। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि इतने कम समय में नामांकन और नाम वापसी नही हो सकती है। मतदान और नामांकन के बीच एक निर्धारित गैप होना चाहिए। वहीं सूत्र बता रहे हैं कि चुनाव की तैयारी पूरी है और ऐसे में यह हो सकता है कि नामांकन की तिथि आगे-पीछे हो जाये। वहीं जानकार ये भी बता रहे हैं कि एमएलसी चुनाव में ज्यादा उम्मीदवार नही होते हैं और निर्धारित तिथियों पर ही सब काम होगा।
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भगवा गढ़ में होगा अब वोटों की ताकत का परीक्षण
गाजियाबाद भगवा गढ है और यहां भाजपा का कार्यकर्ता नेटवर्क सबसे मजबूत माना जाता है। भाजपा ने एमएलसी उम्मीदवार घोषित करते ही संगठन स्तर पर अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल बहुत पहले ही आरकेजीआईटी में आकर बैठक लेकर गये थे। उसके बाद भाजपा उम्मीदवारों के लिए वोट बनवाने का काम शुरू हुआ। कई केन्द्रों पर संयोजक बनाये गये। लगातार इस बात की मॉनिटरिंग हुई कि कितने वोट कौन से क्षेत्र से बने हैं। स्रातक वोटों का पूरा डाटा भाजपा के पास है। फिलहाल उसका वोट बनवाने का कार्यक्रम फिर से एक हफ्ते के लिए शुरू हुआ है। चूंकि एमएलसी चुनाव में कई जिलों से वोट पड़ेंगे ऐसे में गाजियाबाद में भाजपा का जोर इस बात पर रहेगा कि उसे यहां से निर्णायक बढ़त मिले। भगवा गढ़ में अब वोटों की परीक्षण पॉवर का टेस्ट होना है। क्योंकि वोट वही है जो बूथ पर आ जाये। यदि भाजपा यहां से निर्णायक वोट हासिल करती है तो फिर ये गेम उसके लिए इजी हो जायेगा। लेकिन यदि वोट कागजों पर ही हुए और वोटर बूथ पर नही आया तो फिर भाजपा का कमल इस गेम में पिछड़ सकता है।

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