कुछ क्रिकेटरों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन नहीं बना पाए टीम में स्थाई जगह

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नई दिल्ली (ईएमएस)। वनडे वर्ल्ड कप का समापन होने के बाद दुनियाभर की टीमें अब टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी में जुट गई हैं। इसी को ध्यान में रखकर टीमें खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय टीम में मौका भी दे रही हैं। टीम इंडिया भी इसी के तहत युवा खिलाड़ियों के साथ ही अनुभवी खिलाड़ियों को लगातार आजमा रही है। हालांकि इस बीच में कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जिनका कि पूर्व में भारतीय टीम के लिए प्रदर्शन अच्छा रहा है, लेकिन किन्ही वजहों से उनके लिए टीम में जगह बनाना मुश्किल हो रहा है।
कभी टीम इंडिया की मिडल ऑर्डर की रीढ़ माने जाने वाले सुरेश रैना पिछले काफी समय से टीम में वापसी की कोशिश में जुटे हैं। टीम इंडिया को चौथे नंबर पर एक मजबूत बल्लेबाज की जरूरत भी है। रैना ने कुछ दिनों पहले इच्छा भी जताई थी कि वह इस नंबर पर बल्लेबाजी के लिए अभी भी तैयार हैं। आईपीएल में सीएसके की ओर से खेलते हुए उन्होंने इसे साबित भी किया है। इस सीजन उन्होंने तीन अर्धशतकों के साथ टीम के लिए 363 रन बनाए बावजूद इसके उनकी वापसी की संभावना कम ही है, क्योंकि वह टखने की सर्जरी के चलते वह घरेलू टूर्नामेंट में भी नहीं खेल रहे हैं।
करियर के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके दिनेश कार्तिक के लिए यह विडंबना ही है कि वह टीम इंडिया में कभी अपना स्थान लंबे समय के लिए सुनिश्चित नहीं कर पाए। उनका टीम के साथ आना-जाना लगा रहा। विकेट के पीछे अपनी चपलता के साथ ही उन्होंने मौका पड़ने पर उन्होंने अच्छी बल्लेबाजी भी की है। लेकिन यह उनका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि कैरियर की शुरुआत में ही उन्हें महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी की चुनौती का सामना करना पड़ा और जब धोनी का करियर ढलान पर आया तो ऋषभ पंत उनकी राह में रोड़ा बन गए।
हर फन में माहिर केदार जाधव के लिए इस साल खेला गया वर्ल्ड कप सबसे बड़ी चुनौती थी। उनके सामने मौका था कि वह खुद को साबित करें, लेकिन वह उम्मीद पर खरे नहीं उतरे।
भारतीय टीम को बहुत दिनों बाद ऐसा खिलाड़ी मिला जो बैटिंग और बोलिंग के साथ ही विकेट के पीछे भी जिम्मेदारी संभाल सके। जाधव के लिए सबसे बड़ी समस्या उनकी फिटनेस भी रही है। कई बार उन्हें चोट की वजह से भी टीम से बाहर रहना पड़ा। हालांकि वह फाइटर के तौर पर जाने जाते हैं और उम्मीद है कि जल्द ही एक बार फिर से टीम इंडिया में मजबूती से दस्तक देंगे।
उम्मीदों के बोझ तले दबे करुण नायर के लिए इसे बदकिस्मती ही कह सकते हैं कि जिस खिलाड़ी ने करियर के तीसरे ही टेस्ट में तिहरा शतक लगा दिया, उसे अगली सीरीज में खराब प्रदर्शन के बाद दोबारा मौका नहीं मिल सका। इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के आखिरी मैच में 303 रन की नाबाद पारी खेली लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगली सीरीज में तीन मैचों में 54 रन ही बना सके। इसके बाद हालांकि 2017-18 घरेलू सीजन में ठीक-ठाक प्रदर्शन किया लेकिन 2018-19 में उनका बल्ला फिर रूठ गया। इसके बाद तो उनके लिए जैसे टीम इंडिया में उनके लिए दरवाजे ही बंद हो गए।