अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने बीजेपी ने मुस्लिम एबीवीपी नेता शहजादी सैयद को उतारा मुसलमानों को याद रखना होगा इस दल ने स्व. कलाम को राष्ट्रपति बनाया

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हैदराबाद (ईएमएस)। चंद्रयानगुट्टा विधानसभा से 4 बार चुनाव जीतने वाले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी खिलाफ बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। खबर के मुताबिक, बीजेपी ने इस सीट पर अपने मुस्लिम उम्मीदवार शहजादी सैयद को उतारा है। शहजादी सैयद एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ ही वह एबीवीपी की सक्रिय कार्यकर्ता भी हैं। 26 साल की शहजादी सैयद ने बताया कि इस बार वहां के मुसलमान बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रयानगुट्टा के मुसलमान इस बार धर्म से आगे बढ़कर नौकरी और विकास के लिए वोट करने वाले है। उन्होंने कहा, एआईएमआईएम इन सभी वादों को पूरा करने में पिछले कई दशकों से असफल रही है। मेरे जीतने की उम्मीद ज्यादा है।
उस्मानिया विश्वविद्यालय (ओयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर कर चुके शहजादी सैयद आदिलाबाद जिले से हैं और ओयू में दाखिला लेने बाद 2014 में हैदराबाद चली गईं थी। उन्होंने कहा, मैं छात्र राजनीति के समय से ही सक्रिय हूं। मैं एबीवीपी के साथ जुड़ी हूं। मुझे लगता है कि यह सबसे प्रगतिशील और लोकतांत्रिक छात्र संगठन है और राष्ट्रवाद के उनके विचार ने मुझे आकर्षित किया। मैंने एबीवीपी में कई पदों पर काम किया है। शाहजदी सयैद ने आगे कहा, मुस्लिम बीजेपी को एक हिंदू पार्टी के रूप में समझने की गलती करते हैं। मुझे लगता है कि यह एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक पार्टी है। यह बात अब मुसलमान भी समझाना होगा। जब मैंने बीजेपी ज्वाइन किया तो कई मुसलमानों ने मुझे बधाई दी। यह वही पार्टी है जिसने एक मुसलमान एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति के लिए नामांकित किया था। इसके अलावा मुख्तार अब्बास नकवी और सिकंदर भक्त जैसे नेता बीजेपी के साथ हैं। मुझे लगता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में 4 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स ने बीजेपी को वोट किया था।
जब उनसे पूछा गया कि वह कैसे चार बार के सांसद अकबरुद्दीन ओवैसी को हरा पाएंगे ? इस लेकर उन्होंने कहा कि अकबरुद्दीन ओवैसी को लोग डरकर वोट करते हैं और एआईएमआईएम ने मुसलमानो के लिए क्या किया है। बता दें कि तेलंगाना में सात दिसंबर को वोटिंग होगी और मतगणना 11 दिसंबर को होगी। राज्य में 119 विधानसभा सीट है, पिछले विधानसभा चुनाव में तेलंगाना राष्ट्र समिति ने सबसे ज्यादा 90 सीटें जीती थी। जबकि कांग्रेस को 13, एआईएमआईएम को 7, तेलगू देशम पार्टी को 3 और सीपीआई(मा) को 1 सीटें मिली थी।