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अंतरिक्ष ककनीक में सुपर पॉवर बनेगा भारत, आईआईटी और इसरो ने मिलाया हाथ

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मिशन चंद्रयान-2 अपेक्षा के अनुरूप भले ही सफल न हो पाया हो, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने देश को अंतरिक्ष टेक्नॉलॉजी में अजेय बनाने की ठान ली है। इसके लिए देश के दो बड़े संगठनों इसरो और दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। योजना के मुताबिक आईआईटी के छात्र और वैज्ञानिक अंतरिक्ष में भारत की जरुरतों को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान कार्य को अंजाम देंगे। आईआईटी दिल्ली के एक वैज्ञानिक ने बताया कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुसंधान में योगदान देने के लिए इसरो के सहयोग से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया जाएगा।
इसके साथ ही आईआईटी दिल्ली भी आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी मुंबई, आईआईटी कानपुर, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी रूड़की की जमात में शामिल हो जाएगा, जहां अंतरिक्ष विज्ञान में शोध करने के लिए अतंरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं।
दरअसल, आईआईटी तकनीकी ज्ञान को जमीनी जरूरतों के हिसाब से ढालने के मिशन पर काम कर रहा है। यही कारण है कि वह विभिन्न शीर्ष संगठनों से मिलकर उनके क्षेत्र में आने वाली तकनीकी कठिनाइयों को समझकर उसका निदान की कोशिशों में लगा है। आईआईटी इसके अलावा ऑल इंडिया आयुर्विज्ञान संस्थान, आईसीएआर, एनआईआईटी और क्लेम्सन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर अनेक क्षेत्रों में काम कर रहा है।

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