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गांधी जयंती पर तिब्बतियों के प्रधानमंत्री ने अहिंसा का संकल्प लिया

धर्मशाला| निर्वासित तिब्बतियों के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय ने रविवार को महात्मा गांधी की जयंती पर अहिंसा के प्रति केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) की प्रतिबद्धता जताई। सांगेय ने यहां संवाददाताओं से कहा, “गांधी जयंती एक पवित्र दिवस है। वह सफल भरतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के जनक हैं। नैतिकता और आचरण पर उनके विचार अब भी मानव जाति की अंतरात्मा में प्रतिध्वनित होते हैं। इसलिए हम तिब्बती लोग इस समारोह में भाग लेते हैं।” इस अवसर पर सीटीए सचिवालय में एक संक्षिप्त समारोह का आयोजन किया गया, जहां सांगेय ने भरतीय ध्वज फहराया। उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र महासभा में 15 जून, 2007 को पारित प्रस्ताव के अनुरूप आज अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी है। हम गांधी जी के नेतृत्व का अनुसरण करते हुए अहिंसा का वादा करते हैं, जो तिब्ब्त समस्या के समाधान के लिए तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा की परिकल्पना भी है।” उन्होंने कहा कि अहिंसा से सभी संघर्षो का समाधान ढूंढ़ा जा सकता है। उन्होंने तिब्बतियों से संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए शिांति और सकारात्मकता के संदेश को आत्मसात करने का अनुरोध किया। चीन पर निशाना साधते हुए सांगेय ने यह भी कहा कि चीन की सरकार को तिब्बत में तिब्बतियों के मौलिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता बहाल करनी चाहिए। चीन को तिब्बत का मुद्दा शांति और सौहार्द्रपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहिए। तिब्बत के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा साल 1959 से ही भारत में रह रहे हैं। तिब्बतियों की निर्वासित सरकार यहां स्थित है।

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