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राजनीतिक दुश्मनी में जा चुकी है कई नेताओं की जान

करंट क्राइम

गाजियाबाद। वैसे तो राजनीति चुनाव में कामयाबी और सत्ता हासिल करने के लिए की जाती है। लेकिन कभी-कभी सफेद वस्त्रधारियों का राजनीतिक सफर लाल खून के गलियारों से होकर गुजरता है। खोड़ा में भाजपा नेता गजेंद्र भाटी की हत्या राजनीतिक दुश्मनी के चलते हुई है या नहीं, यह तो पता नहीं। लेकिन इतना तय है कि राजनीतिक दुश्मनी में पहले भी कई नेता अपनी जान गवा चुके हैं। जब दिनदहाड़े बदमाशों ने उन्हें गोलियों से भून डाला। हालांकि बाद में कानून हरकत में आया और पुलिस ने मामले का खुलासा भी किया। परंतु बदमाश और उनके आकाओं का मकसद तो पूरा ही हो चुका होता है। फिर आप हत्या का खुलासा करके भी उस नेता की जगह तो नहीं भर सकते। जो जनता के बीच जाकर उनके दुख दर्द बांटता था। राजनीति में अपराधियों का बढ़ता दबदबा और राजनीतिक दुश्मनी आज एक बड़ी समस्या के रूप में सामने खड़ी है। जिसका निराकरण फिलहाल तो दिखाई नहीं दे रहा है।
1 दर्जन से अधिक नेताओं की हो चुकी है हत्या
अगर हम पूर्व विधायक प्यारेलाल शर्मा हत्याकांड से इस मामले को शुरू करें। तो अब तक एक दर्जन से अधिक बड़े नेताओं की हत्या हो चुकी है। जो कि राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय थे। साथ ही उन की जनता के बीच काफी अच्छी पकड़ गई थी। इस कड़ी में प्रदीप त्यागी पिंटू, रघुवीर बिछल,प्रदीप चौधरी टीटी, सुभाष रेत वाला, रामवीर प्रधान डेरी वाले, पूर्व बार अध्यक्ष कुशल पाल त्यागी, कमल राज यादव, राशिद अली, राकेश हसनपुरिया, साहिबाबाद निवासी कांग्रेस नेता ओमप्रकाश शर्मा उनका बेटा और पत्नी को भी मौत के घाट उतार दिया गया था। सभी मामलों को राजनीतिक दुश्मनी के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि इन में कुछ मामलों में निजी कारण भी बाद में सामने आए थे। इसके अलावा भाजपा नेता बृजपाल तेवतिया एवं कांग्रेस के पूर्व मंत्री सतीश शर्मा पर भी जानलेवा हमला किया जा चुका है। गौरतलब है कि देखा गया है सभी नेता या राजनीति से जुड़े हुए लोग पुलिस प्रोटेक्शन या गार्ड के लिए अप्लाई करते हैं। लेकिन सत्ता पक्ष के लोगों को ही कुछ गिने चुने नेताओं को ही पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। ऐसे में निश्चित रूप से पुलिस को भी इस मामले की जांच करनी चाहिए कि किस व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता वास्तव में है या सिर्फ स्टेटस सिंबल के लिए ही गनर मांग रहे हैं।

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