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हॉट सिटी में नहीं लूटे जाते पर्स और मोबाइल

करंट क्राइम

गाजियाबाद। जनपद में पर्स और मोबाइल चोरी नहीं होते है। न तो हॉट सिटी में कोई छपटमार है और न ही कोई जेबकतरा। यह हम नहीं कह रहे है बल्कि यह जिला क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बता रहे है। जिनके मुताबिक गत वर्ष पूरे जनपद में एक भी मोबाइल चोरी नहीं हुआ और यही हाल पर्स का भी है। दरअसल जनपद पुलिस ने पर्स और मोबाइल के चोरी से बचने के लिए एक नायाब तरीका निकाला है। पुलिस ने मोबाइल और पर्स की चोरी की वारदातों को गुमशुदगी में दर्ज करना शुरू कर दिया है। जिसके चलते इन दोनों चीजों की चोरी कागजों में तो बंद ही हो गई है। गुमशुदगी की सूचना सिर्फ जीडी में दर्ज की जाती है। जिसमें किसी प्रकार का कोई मुकदमा दर्ज नहीं होता है। ऐसे मामलों में पुलिस वादी की तहरीर पर थाने की मोहर लगाकर देती है। जिसका अर्थ होता है कि गुमशुदा वस्तु की तलाश की जायेगी अगर मिल गई तो उसके स्वामी को वापस कर दी जायेगी। अगर मामला चोरी का है तो उसकी जांच के बाद मुकदमा, तफ्तीश, केस डायरी, चार्जशीट, बयान, मौका मुआयना सहित कई प्रकार की कानूनी कार्यवाही करनी पड़ती है। साथ ही थानेदार को अपने आला अफसरों की फटकार भी सुननी पड़ती है। गौरतलब है कि किसी व्यक्ति का पर्स या मोबाइल चोरी होने पर जब वह थाने जाता है तो पुलिस उससे चोरी के बजाय गुमशुदगी की तहरीर लाने के लिए कहती है। बताया जा रहा है कि पुलिस पहले तो चोरी के मामले को गुमशुदा में बदल देती है और उसके एवज भी मोहर लगाने के पैसे ऐंठ ले लेती है।
चोरी और गुमशुदगी में अंतर
(1) चोरी- चोरी की वारदात होने पर आईपीसी की धारा 379 एवं 380 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। धारा 379 में खुले स्थान से कोई चीज चोरी पर एवं धारा 380 के अंतर्गत बंद स्थान से चोरी होने पर मामला दर्ज किया जाता है।
(2) गुमशुदगी- गुमशुदगी में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, बल्कि जीडी (जनरल डायरी) में सूचना दर्ज कर क्रमांक अंकित कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस कार्यवाही करने के लिये बाध्य नहीं है।

11 बाइकर्स गैंग नहीं देते हैं वारदात को अंजाम
पुलिस रिकॉर्ड की मानें तो जनपद में कुल 172 अपराधिक गैंग पंजीकृत हैं। जिनमें से 11 बाइकर्स गैंग के नाम से जाने जाते हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि लगभग पिछले डेढ़ वर्ष में बाइकर्स गैंग ने एक भी पर्स या मोबाइल को निशाना नहीं बनाया है। हालांकि गश्त 18 माह के दौरान 8 महिलाओं से चेन और कुंडल आदि जरूर लूटे हैं । बाइकर्स गैंग की तादाद देखते हुए साथ ही अपराध ग्राफ में तेजी का नजारा पुलिस की थ्योरी को सिरे से खारिज कर रहा है। अब पुलिस रिकॉर्ड कहते हैं कि बाइकर्स गैंग मौजूद हैं। जबकि वारदातों के नाम पर बाइकर्स गैंग शून्य है । ऐसे में पुलिस तलाश किसको कर रही है और क्यों कर रही है । इसका जवाब तो हमारी पुलिस ही रह सकती है।

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