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किसानों की लड़ाई राजब्बर लडेंगें,गाजियाबाद के काग्रेंसी नहीं

करंट क्राइम

गाजियाबाद। मंडोला के किसानो के आदोंलन में काग्रेंस ने सबसे पहले आगे आकर उनकी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया था। खुुद काग्रेंस के प्रदेशाध्यक्ष राजबब्बर ने मंडोला पहुंचकर किसानो से मुलाकात की थी। यहां सभा में राजबब्बर नें ये भी कहा था कि किसान पीछे रहेंगें और काग्रेंसी आगें रहेंगे। किसानों की लड़ाई लड़ने का ऐलान करते हुयें काग्रेंस के प्रदेशाध्यक्ष नें कहा था कि किसानों की लड़ाई काग्रेंस लड़ेगी। इस ऐलान के बाद एलआईयू की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि राजबब्बर के आने के बाद मंडोला के किसानो में उत्साह की वृद्वि हुई है। किसानों के लिये खबर ये है कि उनके ही उत्साह में बढ़ोतरी हुई है, काग्रेंसियों के उत्साह में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इधर राजबब्बर गये और उधर काग्रेंसियो ने भी अपनी दुकान समेट ली। पांच दिन बीत जाने के बाद भी ना तो राजबब्बर की और से कोई सदेंश आया और ना ही स्थानीय काग्रेंसी नेता लोनी के मंडोला मे दिखाई दे रहे हैं। हालत ये है कि कागें्रस के प्रदेशाध्यक्ष तो कह गये थे कि किसान पीछे रहेंगे और काग्रेंसी आगे रहेगें। अब सीन ये है कि राजबब्बर का पता नही है कि वो दिल्ली हंै या लखनऊ और काग्रेंसी किसानों के बीच नही हैं। किसान तो मैदान में ही डटे हंै पर उनके साथ डटने वाले लगता है कि हट गये हंै। हालत ये है कि खुुद काग्रेंस के जिला और महानगर सगंठन को पता नही है कि किसानों की लड़ाई लड़ने का स्वरूप क्या रहेगा। सगंठन के नेताओं को पता ही नहीं है कि मंडोला के किसानों के मामले मे किन प्रशासनिक अधिकारियों से मिलना है। प्रर्दशन करना है कि किसानो के साथ मिलकर खेत जोतने हंै। कोई काग्रेंसी नेता किसानो के बीच नही जा रहा है। अब किसानों को भी लगने लगा है कि काग्रेंस के प्रदेशाध्यक्ष सिर्फ उनके बीच हवा हवाई घोषणां करने ही आये थे। खुुद लोनी के किसानों को ही लगने लगा है कि उन्हें अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी। काग्रेंस के नेताआें के रूख को देखकर अब किसान भी हैरान हंै। पांच दिन बीत जाने के बाद भी काग्रेंसियो का कोई अता पता नहीं है। अब तो किसान भी कहने लगे है कि हो सकता है कि राजबब्बर अपने साथ लखनऊ से काग्रेंसी लेने गये हो। गाजियाबाद के काग्रेंसी नेता तो राजबब्बर के जाते ही चले गये थे और उसके बाद दिखाई ही नहीं दिये। वही काग्रेंस के ही कुछ नेता बता रहे है कि जब तक दिशा निर्देश ना मिले तब तक जाकर क्या करेंगे। इस सबंध में अभी तक सगंठन से लेकर पार्टी के किसी नेता को नही बताया गया है कि क्या रणनीती रहेगी और किस तरह से का काग्रेंस कार्यकर्ताओ को किसानो के आदोंलन में भाग लेना है। पहले भी ऐसा हो चुका है गाजियाबाद में काग्रेस का यह कोई पहला मामला नहीं है। ये तो राजबब्बर है इससे पहले राहुल गांधी की घोषणा का हाल भी गाजियाबाद के काग्रेंसियो ने ऐसा ही किया था। विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी के निर्देशो पर यात्रा निकाली गई थी। इसमे राहुल गांधी ने किसानों से उनकी लड़ाई लड़ने का ऐलान कर दिया। इसके तहत किसानों से उनके लोन वाले फार्म भरवाने का जिम्मा काग्रेंस नेताओ को सौंपा गया। आज किसी नेता को पता भी नहीं है कि वो फार्म कहां गये और जो फार्म भरवाये गये थे उनका क्या हुया। यहां तक कि चुनाव के दौरान जिन किसानों से मिलकर उनकी समस्याए नोट की गई थी वो भी वोट के चक्कर में पता नहीं कहां गई। जब टिकट ही सुरेंद्र गोयल को दे दिया गया तो काग्रेंसियों ने भी ये मान लिया कि जब हर टिकट डैडी को ही मिलना है तो रजिस्टर और समस्याओ को भी वही रखकर समाधान करायेंगें।

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