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दरोगा ने कर दिया भाजपा जनप्रतिनिधि का फोन सुनने से इंकार

गाजियाबाद (करंट क्राइम)। पांच साल तक गाजियाबाद की जनता ने उन दरोगाओं का आतंक झेला जिन्हें सपा सरकार का आर्शीवाद प्रदान था। ये वो समय था जब जाति विशेष के सिपाही भी सपा नेताओं को हड़का देते थे। सरकार सपा की थी लेकिन चलती जाति विशेष के अधिकारियों की थी। इसके बाद 11 फरवरी को जब चुनाव आया तो जनता ने जनादेश भाजपा के पक्ष में दिया। 11 मार्च को इसका फैसला भी हो गया।
11 जून भी निकल गयी लेकिन जाति विशेष के दरोगाओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अब भी जनपद में ऐसे दरोगा और अधिकारी जमे हैं जो भाजपा नेताओं की सुनने को भी तैयार नहीं है। अधिकारी और दरोगा ना सपा सरकार के कार्यकाल में सुन रहे थे और ना ही भाजपा सरकार के कार्यकाल में सुनने को तैयार हैं। आम आदमी की बात छोड़ो जन प्रतिनिधियों के फोन भी सुनना दरोगा और अधिकारी पसंद नहीं करते हैं। मामला भाजपा के जनप्रतिनिधि से जुड़ा है। बताते हैं कि एक मामले में चौकी इंचार्ज सुनवाई नहीं कर रहे थे। चौकी इंचार्ज उसी जाति के हैं जिस जाति का दबदबा पिछली सरकार में था।
परेशान लोग क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के पास गए। जनप्रतिनिधि ने लोगों की समस्या सुनी और कहा कि आप चौकी पहुंचकर चौकी इंचार्ज से मेरी बात करा देना। जब लोगों ने चौकी पहुंचकर दरोगा जी से कहा कि जनप्रतिनिधि बात करेंगे तो दरोगा बोला कि कौन जनप्रतिनिधि। इसके बाद लोगों ने जनप्रतिनिधि का नाम और पद बताया तो दरोगा ने कह दिया कि ऐसे जनप्रतिनिधि बहुत देखें हैं हमने, और फोन पर बात नहीं की। इसके बाद लोगों ने जनप्रतिनिधि से कहा कि बात को तब करवाएं जब दरोगा जी फोन सुनने को तैयार हों। काफी जददोजहद के बाद किसी एक ने फोन दरोगा जी के कान पर लगा दिया। उधर से जब जनप्रतिनिधि ने बात की तो दरोगा ने पैतरा बदल लिया और कहा कि मुझे नहीं पता था कि आपका फोन है। इसके बाद लोगों ने समझा कि सुधार हो गया मगर दरोगा जी सुधरे नहीं हैं। बताते हैं कि कुछ दिन बाद फिर किसी मामले में इन्हीं दरोगा जी ने कहा कि होगा जनप्रतिनिधि अपनी जगह मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ता। बात जब जनप्रतिनिधि तक पहुंची तो गुस्सा आना स्वाभाविक था। सूत्र बताते हैं कि मामला एसएसपी तक पहुंचा है। जनप्रतिनिधि ने एसएसपी से दरोगा की शिकायत की है। शिकायत ये भी है कि दरोगा अपने क्षेत्र में कई अवैध कार्य अपने संरक्षण में करा रहा है। तुर्रा ये है कि सपा सरकार के कार्यकाल के जाति विशेष के दरोगा की शिकायत भाजपा के जनप्रतिनिधि द्वारा करने के बाद भी दरोगा के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। दरोगा जी चौकी पर मुस्तैद हैं। वहीं जनप्रतिनिधि अनुशासित पार्टी के कार्यकर्ता हैं। वे मोबाईल आॅडियो रिकॉर्डिंग से बच रहे हैं वरना अपने क्षेत्र में उनकी भी अपनी प्रतिष्ठा है। अब सूत्र बताते हैं कि दरोगा के शब्द ‘जनप्रतिनिधि कुछ नहीं होता है’ की शिकायत जिला संगठन तक जा पहुंची है। बहरहाल सरकार बदलने का कोई असर जिला गाजियाबाद में तो दिखाई नहीं दे रहा है।

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