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कांग्रेस ने हज हाउस को केवल सियासत के लिए बनाया मुद्दा!

डूब क्षेत्र में बना होने के कारण शुरूआत से रहा है विवादित
करंट क्राइम

गाजियाबाद। जनपद में हज हाउस वो इमारत है जिसकी नींव की पहली कुदाल ही विवाद के सुर के साथ शुरू हुई थी। सपा सरकार में हज हाउस का निर्माण शुरू हुआ। हज हाउस के निर्माण की घोषणा होते ही यहां हिन्दू राजनीति गरमा गई थी। हज हाउस को लेकर बकायदा आन्दोलन चला था और मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। जब इसके शिलान्यास की तिथि आई तो ऐसा विवाद हुआ था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का हैलीकाप्टर आयोजन स्थल के ऊपर से उड़कर ही चला गया था। इसके बाद बसपा सरकार आ गई और जब अखिलेश सरकार सत्ता में आई तो यह हज हाउस बनकर तैयार हुआ। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के रूप में इसका उद्घाटन किया। जबसे यह बना है तब से ही डूब क्षेत्र का मुद्दा उठता रहा है। हज हाउस को अभी तक इसका निर्माण करने वाली संस्था सीएडंडीएस जल निगम यूनिट गौतमबुद्धनगर ने उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति को ट्रांसफर नहीं किया है।
हज हाउस के निर्माण पर हिमांशु मित्तल ने एनजीटी में वाद दायर किया था और एनजीटी ने आदेश दिया था कि जब तक वाद निस्तारित नहीं हो जायेगा जब तक यहां से हज यात्री नहीं भेजे जायेंगे। इसी के चलते ताला लगाया गया था। अब जब कांग्रेस के नेताओं को इस पूरे मामले की जानकारी थी तो आखिर वे क्यों हज हाउस के बाहर धरने पर बैठ गये। बड़ी बात यह है कि महिला कांग्रेस की महानगर अध्यक्ष पूजा चड्ढा और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नसीम खान जब धरने पर बैठे तब उनके साथ कांग्रेस के महानगर और जिले के कोई पदाधिकारी नहीं बैठे थे। यहीं से संकेत मिल रहे हैं कि धरने को लेकर कांग्रेस संगठन की ओर से कोई आदेश नहीं थे और यह इन दोनों का निजी फैंसला था। जब कांग्रेसियों को जानकारी थी तब भी वह धरने पर क्या केवल राजनीतिक लाभ के लिए गये थे।
धरने पर बैठे कांग्रेसियों को पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने बकायदा बताया था कि हज हाउस का मामला एनजीटी में लंबित है जिसके चलते हज हाउस का ताला नहीं खोला जा सकता है। हज हाउस के ताले को खुलवाने के लिए कांग्रेसी हट पर उतर आये थे जिसके बाद पथराव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

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