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छिना रोजगार तो उठाया हथियार

सय्यद अली मेहदी (करंट क्राइम)

गाजियाबाद। कहा जाता है कि औरत की इज्जत और मर्द का रोजगार उसके लिए एक ऐसी अमूल्य धरोहर है। जिस पर थोड़ी सी भी आंच आने पर इंसान का जीना मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर किसी भी व्यक्ति से मिलते ही सबसे पहला सवाल यही होता है बताओ भाई तुम करते क्या हो। पिछले दिनों कुछ माह के दौरान नोटबंदी सहित कुछ ऐसी समस्याएं सामने आई। जिसके चलते व्यापारियों का कहना है कि उद्योग-धंधों को काफी नुकसान हुआ। इसकी भेंट कुछ ऐसे लोग चढे जो अब जेल की सलाखों के पीछे हैं। हमारा किसी अपराधी को डिफेंस करने का इरादा नहीं है और ना ही हम किसी अपराधी से किसी तरह की सहानुभूति रखते हैं। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक गत 4 माह में कुछ ऐसे लोग भी सलाखों के पीछे पहुंच गए जो कि बेरोजगारी से तंग आकर जुर्म के रास्ते पर चल पड़े थे। हालांकि जिन्होंने देश के कानून को तोड़ा है उनको सजा हर हाल में मिलनी चाहिए। लेकिन सारी बात कहने के पीछे एक मानवीय पहलू भी है। जिसको इस बिना पर नजर अंदाज किया जा सकता है कि बेरोजगारी का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति चोर या लुटेरा बन जाए। नोटबंदी के चलते उद्योग-धंधों पर बुरी मार पड़ी और कुछ मेहनतकश लोगों ने अपने पालन पोषण के लिए जुर्म का रास्ता अपना लिया। जिन हाथों ने कभी हथौड़ी मशीन फावड़ा आदि चलाया था। उन्हीं हाथों ने जमकर हथियार भी चलाए और नतीजा यह हुआ कि अब वह लोग जेल की सलाखों के पीछे अपने जुर्म की सजा पा रहे हैं।
ट्रक चालकों से लूट करते थे पूर्व टर्नर और हेल्पर
थाना कवि नगर पुलिस ने भी ऐसे ही तीन युवकों को गिरफ्तार किया था। जो पहले एक इंजीनियरिंग कंपनी में टर्नर और हेल्पर के रुप में काम करते थे। पुलिस ने गत 19 मार्च को सुंदर अशोक और मोहनलाल नामक आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जिन पर आरोप था कि वह ट्रक चालकों के साथ लूटपाट की वारदातों को राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर अंजाम देते थे। वही इस बात का भी पता चला था कि अपराधी बनने से पहले तीनों ही औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री में काम करते थे। जहां फैक्ट्री बंद होने के बाद वह लोग बेरोजगार हो गए थे।
गत्ता फैक्ट्री में काम करने वाले बन गए शातिर चोर
गत 9 मार्च को थाना खोड़ा पुलिस ने आबिद जमशेद मुनीष और सरोज नामक युवकों को वाहन चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। जिनके पास से अवैध हथियार और चोरी के तीन वाहन भी मिले थे। मालूम करने पर पता चला कि आबिद, जमशेद, मुनीश और सरोज नोएडा की एक गत्ता बनाने की फैक्ट्री में बेहतरीन कारीगर के तौर पर काम करते थे। लेकिन फैक्ट्री बंद होने के साथ ही चारों ने अपराध की दुनिया में कदम रख लिया।
कच्चे माल की सप्लाई बंद हुई तो बन गए लुटेरे
थाना सिहानी गेट पुलिस ने भी अशफाक, रहमत और शकील नामक ऐसे शातिर लुटेरों को गिरफ्तार किया था। जो कि औद्योगिक क्षेत्र में चोरी एवं लूटपाट की वारदातों को अंजाम देते थे। पूछताछ में पता चला था कि अशफाक और रहमत गुलावठी मसूरी औद्योगिक क्षेत्र में कई फैक्ट्रियों में कच्चे माल की सप्लाई करते थे। जबकि बाद में उनके साथ शकील भी पार्टनर के रुप में शामिल हो गया था। लेकिन फिर दो तीन फैक्ट्रियां बंद हो गई। जिसके बाद से वह लोग कर्ज में डूब गए और बाद में उसी औद्योगिक क्षेत्र में अपराधिक वारदातें करने लगे जहां कभी भी काम धंधा करते थे।
खराद मशीन के बेहतरीन कारीगर बने वाहन चोर
कुछ ऐसा ही अखिल, मुनीश, गुरु, शाहिद और अवतार के साथ हुआ जोकि विजयनगर पुलिस द्वारा वाहन चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए थे । गत 27 अप्रैल को पुलिस ने चारों को गिरफ्तार किया था। जिनके पास से चोरी की तीन मोटरसाइकिल बरामद की गई थी। बताया जाता है कि पांचों आरोपी क्षेत्र में ही एक खराद की मशीन पर अपना काम करते थे । लेकिन नोटबंदी के चलते उनका काम धंधा चौपट हो गया था । जिसके बाद उन्होंने गुनाह का रास्ता चुन लिया।
फेब्रिकेशन कंपनी में कार्यरत थे तीन दोस्त
थाना साहिबाबाद क्षेत्र की साईट 4 इंडस्ट्रियल एरिया में एक फैक्ट्री में संजय, राजू और नावेद नामक तीन दोस्त मेहनत कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। बताया जाता है कि अचानक नोटबंदी के चलते फैक्ट्री बंद हो गई । जहां से सारे स्टाफ गुजरात भेज दिया गया। लेकिन संजय और राजू परिवार की मजबूरियों के चलते नहीं गए । जिसकी वजह से नावेद ने भी गुजरात ना जाने का फैसला किया। पूरे परिवार के आगे अचानक आर्थिक तंगी आ गई। जिसके बाद तीनों दोस्तों ने जुर्म का रास्ता अपना लिया गया। गत 4 फरवरी को साहिबाबाद पुलिस ने तीनों को वाहन चोरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिनके पास से चोरी की दो मोटरसाइकिल भी बरामद की
गई थी।

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