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अल्पसंख्यक आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष सय्यद गैरुल हसन रिजवी से हुई करंट क्राइम की विशेष मुलाकात

अल्पसंख्यक के अधिकारों की रक्षा सबसे बड़ी चुनौती
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सय्यद गैरुल हसन रिजवी ने करंट क्राइम से विशेष बातचीत की। जिसमें राष्ट्रीय मुद्दों से लेकर कश्मीर के हालात तक विस्तृत चर्चा की। श्री रिजवी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अल्पसंख्यकों को उनके संवैधानिक अधिकार हर हालत में मिलना चाहिए। कहीं भी किसी भी व्यक्ति भेदभाव की नजर से ना देखा जाए। आयोग बेहद सतर्कता से अपना काम कर रहा है। अगर उन्हें अल्पसंख्यकों के अधिकारों को की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने पड़े तो पीछे नहीं हटेंगे। श्री रिजवी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि आयोग बहुत अच्छी तरह जानता है कि उसे क्या करना है और एक विस्तृत रणनीति के तहत आयोग काम कर रहा है। संविधान सर्वोपरि है और संवैधानिक अधिकारों को आम जनता तक पहुंचाना न्याय व्यवस्था को दिशा निर्देश जारी करना आयोग का सर्वप्रथम कार्य है। कहीं कठोर तो कहीं मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आयोग लंबित मामलों को तेजी से निपटा रहा है। इसी तरह के अनेक मुद्दों पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री रिजवी ने करंट क्राइम संवाददाता सय्यद अली मेहदी से विस्तृत बातचीत की।

भाजपा सरकार और अल्पसंख्यकों के बीच एक दूरी है इस संबंध में आपका क्या कहना है?
इस सवाल का माकूल जवाब तो भारतीय जनता पार्टी के लीडर ही दे सकते हैं। जहां तक अल्पसंख्यक आयोग का सवाल है। तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि सरकार अल्पसंख्यकों के लिए बहुत बेहतर कार्य कर रही है। सरकार और अल्पसंख्यकों के बीच स्थिति बहुत मजबूत है। हालांकि इसमें थोड़ी बहुत सुधार की गुंजाइश इसलिए है। क्योंकि कुछ फिरकापरस्त और मतलब परस्त लोग अल्पसंख्यकों को बहकाने का काम करते हैं। जिससे सरकार और अल्पसंख्यकों के बीच गलतफहमियां पैदा हो जाती है। लेकिन स्थिति तेजी से बदल रही है और इस दिशा में बहुत वाजिब काम किए जा रहे हैं। जिसका नतीजा सामने आने लगा है। सरकारी नीतियां अल्पसंख्यक वर्ग में आने वाले सभी लोगों के लिए एक ही हैं चाहे वह मुस्लिम हो, जैन हो, सिख हो, पारसी हो, बौद्ध हो या अन्य। सरकारी नीतियां सभी को एक नजर से देखती हैं और अधिक से अधिक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। जिससे अल्पसंख्यकों को लाभ मिल रहा है और उनकी धारणा केंद्र सरकार के प्रति बहुत तेज गति से बदल रही है।
एक चेयरमैन होने के नाते आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?
अल्पसंख्यकों के संविधानिक अधिकार की रक्षा करना आयोग की प्रमुख जिम्मेदारी होती है। इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही लगभग 1500 लंबित पड़ी याचिकाओं पर तेज गति से कार्यवाही की जाएगी। ताकि समय रहते पीड़ित को न्याय मिल सके और दोषी को सजा। दरअसल आयोग में इस तरह की शिकायतें आती हैं कि पीड़ित के साथ भेदभाव, अत्याचार, सामाजिक, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया है। यकीनन यह एक बहुत भयानक स्थिति होती है। क्योंकि स्थानीय पुलिस एवं अन्य अधिकारियों से जब किसी मजबूर, मायूस इंसान को इंसाफ नहीं मिलता है। तो वह आयोग का दरवाजा खटखटाता है। ऐसे लोगों के साथ इंसाफ करना आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मेरा नजरिया बिल्कुल साफ है। पीड़ित कितना भी गरीब या मजबूर क्यों न हो और दोषी कितना भी सामर्थ क्यों न हो। इंसाफ गरीब को जरूर मिलेगा और दोषी को कानूनन सजा दिलाई जाएगी। दरअसल जब गरीब और मजबूर लोगों को इंसाफ नहीं मिलता है। तो समाजिक असंतुलन पैदा हो जाता है। जो कभी कभी सोशलिज्म के लिए बेहद खतरनाक होता।
अल्पसंख्यकों की सबसे बड़ी समस्या क्या है और उसके निदान के लिए आयोग क्या कर रहा है?
इस समय मौजूदा हालात की बात की जाए तो सरकारी योजनाएं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के माध्यम से संचालित की जा रही हैं। लेकिन ऐसा देखा गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय को जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में बहुत अधिक जानकारी ही नहीं है। जिसके चलते जितना लाभ जनकल्याणकारी योजनाओं से उठाया जा सकता है, उठाया नहीं जा रहा है। यह एक बड़ी समस्या है साफ तौर पर आप इसे जागरूकता का अभाव कह सकते हैं। जब लोगों को जानकारी ही नहीं है। तो वह किस तरह से सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस संबंध में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय बहुत बेहतर ढंग से काम कर रहा है। इसके अलावा कमीशन भी लगातार विभिन्न राज्यों में सेमिनार का आयोजन कर जागरुकता फैला रहा है।ताकि लोगों को अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके और सरकार एवं आयोग का मकसद पूरा हो सके। इसके अलावा आयोग एवम अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर भी कल्याणकारी योजनाओं संबंधी विस्तृत एवं पूर्ण जानकारी है। आयोग डिजिटल माध्यम से भी जन जागरण फैलाने का काम कर रहा है जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है।
अल्पसंख्यकों की शैक्षिक , आर्थिक और सामाजिक स्थिति में कितना और कैसे बदलाव आ रहा है?
अल्पसंख्यक वर्ग के लिए हर लिहाज से बेहतर कोशिश की जा रही है। अगर आप देखेंगे तो छात्र, टीचर, सेवादार,व्यापारी, कारीगर सहित सभी वर्गों के लिए दर्जनों ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनका लाभ बहुत तेजी से अल्पसंख्यक वर्ग के सभी लोगों तक पहुंच रहा है। सरकार ने बेहद विस्तृत रणनीति बनाते हुए अल्पसंख्यकों के उत्थान सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति की बेहतरी के लिए काम किए हैं। पिछले दो-तीन साल में जिस तरह से देशभर में अल्पसंख्यकों के लिए कल्याणकारी योजनाएं विस्तारपूर्वक चलाई जा रही हैं। ऐसा पहले शायद ही कभी हुआ हो। निश्चित रुप से आगे स्थिति बहुत बेहतर है और आने वाले वक्त में उम्मीदें और अधिक परवान चढ़ेगी। शिक्षा हासिल करना सभी का अधिकार है। आज की जरूरत ही यह है कि एजुकेशन गरीब तबके तक पहुंचाई जा सके। अल्पसंख्यकों के लिए स्कॉलरशिप सहित और भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिससे वे एजुकेशन हासिल कर सके और उन्हें आर्थिक तंगी का एजुकेशन के लिए सामना ना करना पड़े। ऐसे में आज अल्पसंख्यकों के लिए एजुकेशन हासिल करने की बेहतर संभावनाएं हैं।
प्राइवेट एवं सरकारी स्कूलों में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण कोटा नहीं है क्या आप की जरूरत महसूस होती?
नहीं अल्पसंख्यकों को सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में आरक्षण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पहले ही अल्पसंख्यक स्टेटस के स्कूलों में आरक्षण दिया जा रहा है अगर सभी स्कूलों में अल्पसंख्यकों को आरक्षण दीया जाने लगा तो आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी फिर अन्य आरक्षित लोग कहां जाएंगे इसलिए यह सोच समझकर आरक्षण का निर्धारण किया गया है जो के सभी गरीब तबके के लोगों से जुड़े मामलों में फायदेमंद साबित हुआ है।
आपने कुछ लोगों को पाकिस्तान जाने की हिदायत भी दे डाली थी क्या मामला था?
जवाब- वह इंडिया और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच की बात थी। जब इंडिया मैच हार गया तो कुछ कमजर्फ लोगों ने खुशियां मनाई थी। जो कि जाति तौर पर मुझे बेहद नागवार गुजरी। दरअसल जो लोग देश की हार पर खुशियां मनाएं, उन्हें इस देश में रहने का कोई हक नहीं है। वह जिनकी खुशियों में शरीक होना चाहते हैं। उन्हीं के पास जाकर क्यों नहीं रह लेते। जिन्होंने टीम इंडिया की हार पर खुशियां मनाई थी। उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए । यही उनके लिए बेहतर रास्ता है क्योंकि देश से मोहब्बत करना हर हिंदुस्तानी का पहला फर्ज है।

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